पुलिस अधिकारियों के अनुसार सूरज पटेल को 14 जून को वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस से अभद्रता, शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उसकी कार में काली फिल्म लगी थी और वह बिना नंबर प्लेट के वाहन चला रहा था। इस घटना के बाद मामला काफी चर्चा में रहा था। ठेमी पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी 19 जून को जमानत पर रिहा हो गया है। पुलिस पहले से ही उसके खिलाफ लंबित स्थायी वारंट की तामील के लिए सक्रिय थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सूरज पटेल को जेल के बाहर से ही दोबारा गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, सूरज पटेल के खिलाफ जेएमएफसी न्यायालय जबलपुर द्वारा धारा 138 एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के तहत स्थायी वारंट जारी किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी ने जबलपुर के एक व्यापारी से 3 लाख रुपये उधार लिए थे और भुगतान के लिए दिया गया चेक बाउंस हो गया था। इसके बाद व्यापारी ने न्यायालय का रुख किया, जहां सुनवाई के उपरांत आरोपी के विरुद्ध स्थायी वारंट जारी किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी लंबे समय से वारंटी था और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे थे। जैसे ही उसके जेल से जमानत पर रिहा होने की सूचना मिली, पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया और विधिवत न्यायालय में पेश किया। सूत्रों के मुताबिक, सूरज पटेल के रिहा होने के बाद शहर में जश्न और जुलूस की तैयारी की जा रही थी, लेकिन दोबारा गिरफ्तारी से यह सब अधूरा रह गया।
जबलपुर/नरसिंहपुर। नरसिंहपुर में ट्रैफिक पुलिस से विवाद के मामले में जमानत पर रिहा हुए सूरज पटेल को जेल से बाहर आते ही पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ जबलपुर न्यायालय से 3 लाख रुपये के चेक बाउंस प्रकरण में स्थायी वारंट जारी था, जिसकी तामील के लिए पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी।