khabar abhi tak

भाजपा:निगम और मंडलों के पदाधिकारियों का अब हर छह महीने में बनेगा परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड

केवल पद पाना काफी नहीं, अब कामकाज और सक्रियता के दम पर ही बचेगी कुर्सी, जबलपुर की नियुक्तियां भी इस नियम की जद में




जबलपुर। सरकार और संगठन को मजबूती देने के लिए हाल ही में जबलपुर विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न निगमों, मंडलों, बोर्डों और आयोगों में की गई नियुक्तियों के बाद अब तैनात किए गए पदाधिकारियों की असली परीक्षा शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप प्रशासन ने इन पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एक बेहद सख्त और नई निगरानी व्यवस्था लागू की है। इस नई नीति के तहत केवल राजनीतिक संतुलन बनाना ही इन नियुक्तियों का मकसद नहीं है, बल्कि अब सभी पदाधिकारियों के कामकाज का हर छह महीने में एक विस्तृत और कड़ा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ही नेताओं की सक्रियता, जनता के हितों से जुड़े कार्यों में उनकी रुचि और संगठन के प्रति उनके योगदान का सटीक आकलन किया जाएगा। आगामी 2 साल के भीतर होने वाले चुनावी घटनाक्रमों को देखते हुए सरकार और संगठन दोनों ने ही अब हर स्तर पर इन नेताओं के कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण की नियमित समीक्षा करने का फैसला किया है।

जमीनी स्तर पर सरकार और जनता के बीच मजबूत पुल की भूमिका

​सरकार का स्पष्ट मानना है कि जबलपुर विकास प्राधिकरण और अन्य विकास से जुड़े संस्थान केवल प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता और प्रशासन के बीच संवाद कायम करने का सबसे बड़ा माध्यम हैं। इसी कारण से इन पदों पर बैठे पदाधिकारियों को नियुक्तियों के तुरंत बाद विशेष प्रशिक्षण देकर उनकी नई जिम्मेदारियों और सटीक कार्यप्रणाली से पूरी तरह अवगत करा दिया गया है। आने वाले छह महीने इन सभी नेताओं के लिए पहली सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाले हैं, जहां उन्हें न केवल अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित करनी होगी बल्कि राजनीतिक रूप से भी अपनी सक्रियता का दमदार प्रदर्शन करना होगा। इन पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में जाकर सरकार की हर एक कल्याणकारी योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें और यह भी देखें कि योजना का पूरा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी रुकावट के पहुंचे।

गुटबाजी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए गृह क्षेत्रों से बाहर तैनाती

​संगठन ने इस बार बेहद सोच-समझकर रणनीति बदली है और स्थानीय स्तर पर होने वाली गुटबाजी को पूरी तरह समाप्त करने के लिए कई पदाधिकारियों को उनके गृह जिलों या पसंदीदा विधानसभा क्षेत्रों से दूर एकदम नए और अलग क्षेत्रों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी हैं। माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर आपसी खींचतान पर पूरी तरह अंकुश लगेगा और संगठन को नए क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। इन सभी पदाधिकारियों की जिम्मेदारी अब केवल अपने विभागीय दफ्तरों या दफ्तरी कामकाज तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आगामी नगरीय निकाय चुनावों और 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों की जमीनी तैयारियों में भी इनकी भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से यह साफ हो गया है कि नियुक्तियां केवल नेताओं को राजनीतिक पुनर्वास देने के लिए नहीं हैं, बल्कि इसका सीधा मकसद संगठन का तेजी से विस्तार करना है।

चुनावी चुनौतियों से निपटने फील्ड मैनेजर का फंडा

​आगामी समय में होने वाले चुनावों में इन पदाधिकारियों को पूरी तरह से फील्ड मैनेजर की भूमिका निभानी होगी, जिसका सीधा मतलब है कि उन्हें सीधे जनता के बीच मौजूद रहना होगा। पदाधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे आम जनता के बीच लगातार सक्रिय रहें, उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को गहराई से समझें और उनके त्वरित समाधान के लिए खुद आगे बढ़कर पहल करें, जिससे शासन के प्रति समाज में एक सकारात्मक और विश्वास से भरा माहौल तैयार हो सके। चुनावी नजरिए से इन नेताओं को बूथ स्तर तक जाकर संगठन के ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने, सामान्य कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने और समाज के नए वर्गों को जोड़कर दल की पहुंच को हर घर तक पहुंचाने का बेहद महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है। जिन क्षेत्रों में पिछले समय में मनमुताबिक सफलता नहीं मिल सकी थी, वहां विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है और छह महीने बाद आने वाली यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि कौन सा नेता उम्मीदों पर कितना खरा उतरा है।


Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak