जांच दल की रिपोर्ट के बाद जिला पंचायत सीईओ ने जारी किया बर्खास्तगी का आदेश
जबलपुर। जिले की जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत ग्राम पंचायत दर्शनी के सरपंच सुमित राय को वित्तीय अनियमितताओं और पद के दुरुपयोग के मामले में तत्काल प्रभाव से पद से पृथक कर दिया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जबलपुर द्वारा मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत यह कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता मोहन झारिया की शिकायत पर की गई जांच में यह सिद्ध हुआ कि सरपंच सुमित राय ने नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए पंचायत निधि की राशि का भुगतान अपने पिता संतोष राय के नाम पर कर दिया था। जांच दल में शामिल ब्लॉक पंचायत अधिकारी भगवानदास साहू, उपयंत्री विजय प्रकाश यादव और सहायक प्रबंधक सुधीर शुक्ला की रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय विहित प्राधिकारी ने सरपंच को कर्तव्यों के निर्वहन में दुराचरण का दोषी पाते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है।
पिता के खाते में ट्रांसफर की गई सरकारी राशि
इस पूरे मामले की शुरुआत ग्राम दर्शनी के निवासी मोहन झारिया की एक शिकायत से हुई थी। जांच टीम ने जब पंचायत के वित्तीय दस्तावेजों और पंचायत दर्पण पोर्टल के रिकॉर्ड को खंगाला, तो उसमें भारी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई। जांच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि सरपंच सुमित राय ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी धन का मनमाना इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने पिता संतोष राय को तीन अलग-अलग किश्तों में क्रमशः 15000/-, 15000/- और 20000/- रुपये का भुगतान कर दिया। इस प्रकार कुल 50000/- रुपये की राशि नियमों को ताक पर रखकर परिवार के सदस्य को ट्रांसफर की गई, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।
जांच में खुली निर्माण कार्यों के बहानों की पोल
कार्रवाई से बचने के लिए सरपंच सुमित राय ने जांच दल के सामने अपना पक्ष रखते हुए एक सफाई पेश की थी। उनके बयान के अनुसार वर्ष 2023 में ग्राम पंचायत में रंगमंच और सामुदायिक भवन का निर्माण कार्य चल रहा था। इस निर्माण कार्य के लिए गुरुजी निवासी रामभैया चक्रवर्ती से 7000 और 3000 ईंटें खरीदी गई थीं। सरपंच का दावा था कि इन ईंटों का कुल भुगतान क्रमशः 35000/- रुपये और 15000/- रुपये उनके पिता संतोष राय ने 18.07.2023 और 02.11.2023 को अपनी जेब से किया था। इसी वजह से यह सरकारी राशि वापस पिता को दी गई थी। हालांकि जांच दल ने इस दलील को खारिज करते हुए इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
नियमों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन का सख्त एक्शन
जनपद पंचायत मझौली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा गठित जांच दल की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया। मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (क) (ख) के तहत सरपंच को सरकारी पद पर रहते हुए अपने सगे रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने का सीधा दोषी माना गया। कानून के मुताबिक कोई भी जनप्रतिनिधि अपने पद पर रहते हुए अपने परिजनों को वित्तीय लाभ नहीं पहुँचा सकता। इस गंभीर कदाचार और वित्तीय गड़बड़ी के कारण सक्षम अधिकारी ने आदेश जारी कर सुमित राय को सरपंच पद से बर्खास्त कर दिया है, जिससे क्षेत्र के अन्य जनप्रनिधियों को सख्त संदेश मिला है।
