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स्थानांतरण नीति की जटिलताओं से कर्मचारी वर्ग परेशान



जबलपुर। मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने प्रदेश सरकार की वर्तमान स्थानांतरण नीति में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने और इसकी समय सीमा बढ़ाने की पुरजोर मांग की है। संघ के प्रांताध्यक्ष अतुल मिश्रा तथा जिलाध्यक्ष नितिन अग्रवाल ने इस संबंध में विस्तृत वक्तव्य जारी किया है। कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण प्रक्रिया प्रत्येक लोकसेवक के लिए सरल और सुलभ होनी चाहिए। वर्तमान नीति में लागू किए गए 90% उपस्थिति और विषयवार प्रतिशत के कड़े मापदंडों के कारण कर्मचारियों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस व्यवस्था से वर्षों से अपने परिवारों से दूर दराज के क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे कर्मचारी बेहद परेशान हैं। इस मांग का समर्थन करने वालों में रत्नेश मिश्रा, दुर्गेश पांडेय, अभिषेक मिश्रा, प्रमोद वर्मा, एसके प्रधान, आशीष लाल, प्रभात जाट और उमाचरण झरिया शामिल हैं।

कठिन नीतिगत मापदंडों से लोकसेवक बेहद असंतुष्ट 

​सरकारी नीति के वर्तमान प्रावधानों से कर्मचारी वर्ग में भारी निराशा है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार ९०% हाजिरी और विषयवार प्रतिशत की बाध्यता ने पूरी प्रक्रिया को उलझा दिया है। इस तकनीकी व्यवस्था के कारण जरूरतमंद कर्मचारियों के आवेदन निरस्त हो रहे हैं। स्थानांतरण का लाभ नहीं मिलने से मैदानी अमला मानसिक दबाव में कार्य कर रहा है।

पारिवारिक दूरियां मिटाने के लिए सरलीकरण जरूरी

​दूरस्थ जिलों में तैनात कर्मचारी वर्षों से अपने गृह जिले में वापसी की राह देख रहे हैं। संघ ने सरकार से आग्रह किया है कि वर्तमान स्थानांतरण नीति का दोबारा गहन अध्ययन किया जाए। इस व्यवस्था को व्यावहारिक बनाकर इसकी समय अवधि को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि सभी पीड़ित लोकसेवकों को न्याय मिल सके और वे बेहतर माहौल में कार्य कर सकें।

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