जबलपुर। करमेता क्षेत्र में लाल हवेली के सामने नगर निगम ने घोर लापरवाही बरतते हुए बिना किसी सुरक्षा अनुमति के 132 केवी मुख्य ट्रांसमिशन टावर के ठीक नीचे सड़क का निर्माण कर दिया है। यह हाईटेंशन लाइन शहर की बिजली आपूर्ति के लिए रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण सबस्टेशन विनोबा भावे और व्हीकल फैक्ट्री को आपस में जोड़ती है। इस निर्माण कार्य से पहले नगर निगम प्रशासन ने मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी यानी एमपी ट्रांसको से न तो कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया और न ही किसी प्रकार की कागजी औपचारिकता पूरी की। इस गंभीर चूक के कारण क्षेत्र में हर समय जानलेवा हादसे का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों द्वारा कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस संवेदनशील मामले पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।
नियमों को दरकिनार कर खींची गई सड़क
विद्युत अधिनियम के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार हाईटेंशन ट्रांसमिशन टावर के नीचे या उसके बेहद नजदीक किसी भी तरह का पक्का निर्माण अथवा सड़क बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमानुसार यदि सड़क के रास्ते में कोई टावर आ रहा था, तो नगर निगम को उसे वहां से हटाने के लिए एमपी ट्रांसको को लिखित आवेदन देना था और इस स्थानांतरण का पूरा खर्च भी नगर निगम को ही उठाना था। लेकिन इस मामले में ठेकेदार, निगम के इंजीनियरों और बिजली कंपनी के अफसरों की आपसी सांठगांठ या घोर लापरवाही के चलते सीधे टावर के नीचे ही सड़क का निर्माण कर दिया गया।
आधे से ज्यादा शहर की बिजली व्यवस्था पर संकट
इस मुख्य ट्रांसमिशन लाइन से जुड़े विनोबा भावे और व्हीकल फैक्ट्री सबस्टेशन से जबलपुर शहर की आधी से अधिक आबादी को बिजली की आपूर्ति की जाती है। सड़क बनने के बाद अब यदि कोई तेज रफ्तार वाहन इस टावर से टकराता है या तारों में शॉर्ट सर्किट होता है, तो जान-माल का भारी नुकसान होना तय है। यदि इस टावर के पास कोई दुर्घटना होती है, तो पूरे शहर की बिजली व्यवस्था कई दिनों के लिए पूरी तरह ठप हो जाएगी। स्थानीय जनता में इस खतरे को लेकर भारी आक्रोश है और लोग तुरंत उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

