गौरतलब है कि करीब तीन महीने में दूसरी बार घरेलू गैस महंगी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 बढ़ाए गए थे। इस तरह 3 महीने के अंदर घरेलू सिलेंडर 110 रुपए महंगा हो गया है। जानकारी के अनुसार, तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी ऊर्जा लागत और घरेलू बिक्री पर नुकसान के कारण कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 703 का नुकसान हो रहा था। दाम बढऩे से बावजूद सिर्फ आंशिक भरपाई होगी। 2026 से पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में 50 का इजाफा किया था। 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 तक बढ़ाए गए थे। 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी 11 का इजाफा किया गया था, जिससे इसकी कीमत 821.50 हो गई।
LPG से पहले पेट्रोल, डीजल व CNG के दाम भी बढ़े-
पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर 7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि सीएनजी करीब 6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 11 प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के महंगे होने का कुछ बोझ सरकारी तेल कंपनियां खुद उठा रही हैं।