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मार्च में जीरो, जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा बिजली का फ्यूल सरचार्ज, गुपचुप बढ़ोतरी पर एतराज



जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्य प्रदेश में ऊर्जा मंत्री को बिना जानकारी दिए बिजली के फ्यूल सरचार्ज में की गई भारी वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में डॉ. पीजी नाजपांडे, रजत भार्गव, टीके रायघटक, संतोष श्रीवास्तव, एडवोकेट वेदप्रकाश अधौलिया, एडवोकेट जीएस सोनकर, सुशीला कनौजिया, गीता पांडे, राजेश गिदरोनिया, यशवंत कोष्टा, अर्जुन कुमार, अशोक यादव और पी.एस. राजपूत सहित अनेक जन संगठनों ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य सरकार और विद्युत नियामक आयोग को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। इस पत्र में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी फ्यूल सरचार्ज की मनमानी वसूली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है। उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इस मामले में तुरंत जांच कमेटी गठित करने का आग्रह किया गया है।

​उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले का हवाला

पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में वहां के ऊर्जा मंत्री ने फ्यूल सरचार्ज की वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों पर एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करके जवाब मांगा है कि बिना सूचना दिए इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों की गई। इस सख्त कदम के बाद अब मध्य प्रदेश के उपभोक्ता संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और वे यहां भी इसी तरह की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं ताकि आम जनता पर आर्थिक बोझ न बढ़े।

​मध्य प्रदेश में मनमानी बढ़ोतरी के आंकड़े

उपभोक्ता मंच ने बताया कि मध्य प्रदेश में मार्च के महीने में फ्यूल सरचार्ज 0 प्रतिशत पर था। बिजली कंपनियों ने इसे अप्रैल में बढ़ाकर 5.36 प्रतिशत और फिर मई-जून के महीने में 3.91 प्रतिशत कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस भारी बढ़ोतरी को लागू करने से पहले मध्य प्रदेश सरकार को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही उनसे किसी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति ली गई, जिससे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

​विद्युत एक्ट की धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग

मंच के पदाधिकारियों के अनुसार विद्युत नियामक आयोग के रेगुलेशन में प्रथम संशोधन के तहत फ्यूल सरचार्ज की ऑटोमैटिक वृद्धि करने के निर्देश जरूर हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास भी असीमित अधिकार सुरक्षित हैं। प्रदेश सरकार को बिजली उपभोक्ताओं के हक में विद्युत अधिनियम में प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए धारा 108 का तुरंत उपयोग करना चाहिए। जन संगठनों ने साफ किया है कि आम जनता को इस गुप्त और अनाप-शनाप आर्थिक बोझ से बचाने के लिए सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना होगा।

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