जबलपुर। स्मार्ट सिटी ने अपने ही कर्मचारी-अधिकारियों के ईपीएफ का पैसा दबा लिया है। यह पैसा एक-दो साल का नहीं बल्कि 8 वर्ष का है। कर्मचारियों के अंशदान पर नजर डाले तो यह राशि 11 लाख रूपए से अधिक हो जाती है। पिछले वर्षों से यह राशि क्यों नहीं जमा की गई ? यह राशि कहां है ? ये सवाल स्मार्ट सिटी के आला अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है। उधर, ईपीएफओ ने स्मार्ट सिटी को अल्टीमेटम दे दिया है कि 7 दिनों में इसे जमा नहीं किया गया तो उनके खिलाफ एक्शन ले लिया जाएगा।
कर्मचारियों के भविष्य निधि अंशदान को लेकर जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जबलपुर द्वारा जारी स्मरण पत्र क्रमांक 1718350/180 दिनांक 15 मई 2026 में खुलासा हुआ है कि अक्टूबर 2017 से नवंबर 2025 तक की अवधि का कुल ₹23,40,857 भविष्य निधि बकाया अब भी जमा नहीं किया गया है।
ईपीएफओ द्वारा पूर्व में 23 अप्रैल को आदेश जारी किया गया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी राशि जमा नहीं होने पर विभाग को स्मरण पत्र जारी करना पड़ा। दस्तावेज के अनुसार कर्मचारी अंशदान ₹11.21 लाख, नियोक्ता अंशदान ₹3.43 लाख, म्च्ै अंशदान ₹7.78 लाख तथा अन्य प्रभार सहित कुल देय राशि ₹23.40 लाख है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों के वेतन से काटी गई पीएफ राशि आखिर वर्षों तक जमा क्यों नहीं की गई? यदि कर्मचारियों का अंशदान कटने के बावजूद उनके खातों में जमा नहीं हुआ तो यह राशि कहां गई।
ईपीएफओ ने चेतावनी दी है कि सात दिनों के भीतर ईसीआर के माध्यम से राशि जमा कर चालान प्रस्तुत किया जाए अन्यथा कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1952 के तहत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
ईपीएफ राशि एक नजर में
कर्मचारी अंशदान (ईपीएफ-ईई शेयर) 11,21,820 रूपए।
नियोक्ता अंशदान (ईपीएफ-ईआर शेयर) 3,43,112 रूपए।
ईपीएफ प्रशासनिक शुल्क 50,430 रूपए।
कर्मचारी पेंशन योजना ईपीएस अंशदान 7,78,752 रूपए।
ईडीएलआई अंशदान 46,743 रूपए।
कुल बकाया राशि 23,40,857 रूपए।

