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मध्यप्रदेश में बिजली क्रांति, अमरकंटक में 660 मेगावाट की नई यूनिट का काम शुरू




ज़बलपुर। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अनूपपुर जिले के चचाई स्थित अमरकंटक ताप विद्युत गृह में 660 मेगावाट क्षमता की नई सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर यूनिट के निर्माण ने रफ्तार पकड़ ली है। इसी सिलसिले में परियोजना के सबसे मुख्य हिस्से, यानी बॉयलर क्षेत्र में जमीन की खुदाई का काम शुरू कर दिया गया है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड की तकनीकी टीम ने इस निर्माण कार्य की शुरुआत की है, जिसे परियोजना का पहला बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य पुरानी और बंद हो चुकी इकाइयों की जगह इस आधुनिक तकनीक वाली यूनिट को स्थापित करना है, जो पर्यावरण के अनुकूल होगी। कार्यपालक निदेशक तनवीर अहमद की देखरेख में इस पूरी परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने का खाका तैयार किया गया है।

​अमरकंटक में रिकॉर्ड समय में तैयार हुआ बुनियादी ढांचा

​इस बड़ी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए अमरकंटक ताप विद्युत गृह की टीम ने शुरुआती दौर में बेहद तेजी से काम किया है। बिजलीघर के स्विच यार्ड क्षेत्र में बे-1 से लेकर बे-5 तक की जमीन को रिकॉर्ड समय में खाली कराया गया। जमीन खाली कराने के बाद वहां समतलीकरण और साइट डेवलपमेंट से जुड़े सभी जरूरी बुनियादी काम वक्त पर पूरे कर लिए गए। इसी तैयारी की वजह से अब मुख्य बॉयलर क्षेत्र में बिना किसी रुकावट के खुदाई का काम तय शेड्यूल के मुताबिक शुरू हो सका है।

​जून 2030 तक भेल पूरी करेगी निर्माण और संचालन का जिम्मा

​इस पूरी परियोजना को समय पर पूरा करने की जिम्मेदारी देश की प्रतिष्ठित कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड को सौंपी गई है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने भेल के साथ हुए अनुबंध के तहत जून 2030 तक इस यूनिट का निर्माण, टेस्टिंग और सफल संचालन कर इसे सौंपने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सितंबर 2025 में नोटिफिकेशन ऑफ अवार्ड जारी किया गया था, जिसके बाद दोनों कंपनियों के बीच सामान की सप्लाई, मशीनरी की स्थापना और सिविल निर्माण से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं पर सहमति बन चुकी है।

​सारनी के सतपुड़ा पावर हाउस में भी कंक्रीट कार्य हुआ तेज

​मध्यप्रदेश में सिर्फ अमरकंटक ही नहीं, बल्कि सारनी स्थित सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में भी 660 मेगावाट की एक और सुपरक्रिटिकल इकाई पर काम तेजी से चल रहा है। वहां भी बीते 10 जून को मुख्य बॉयलर क्षेत्र में पहला प्लेन सीमेंट कंक्रीट पोरिंग का काम सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है। कंपनी इन दोनों बड़ी परियोजनाओं को तय समय से पहले पूरा करने की कोशिश में जुटी है, ताकि वर्ष 2030 तक मध्यप्रदेश को अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा सके और राज्य का ऊर्जा ढांचा मजबूत हो।

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