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समय पर पूरा होगा सारनी का नया 660 मेगावाट का बिजली प्रोजेक्ट,काम की रफ्तार बढ़ी

जबलपुरमध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी द्वारा ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया गया है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी में निर्माणाधीन 660 मेगावाट क्षमता की नई सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। इस परियोजना के मुख्य बॉयलर क्षेत्र में पहले प्लेन सीमेंट कंक्रीट यानी पीसीसी पोर का काम औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह के कुशल निर्देशन और सीधी निगरानी में इस कार्य का शुभारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर सतपुड़ा ताप विद्युत गृह के मुख्य अभियंता सुशील लिल्लोरे सहित कई वरिष्ठ अभियंता और तकनीकी कार्मिक विशेष रूप से साइट पर मौजूद रहे।

भारी बॉयलर ढांचे के लिए तैयार हो रहा है मजबूत आधार

​परियोजना के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से में इस बुनियादी सिविल कार्य की शुरुआत होने से अब प्लांट की मजबूत नींव का काम तेज गति से आगे बढ़ सकेगा। थर्मल पावर प्लांट का बॉयलर बेहद विशाल और भारी ढांचा होता है जिसके टिकाऊपन के लिए एक स्थिर आधार बेहद जरूरी माना जाता है। मुख्य अभियंता के अनुसार कंपनी प्रबंधन द्वारा की जा रही लगातार समीक्षा और तय समयसीमा के अनुसार मॉनिटरिंग के कारण ही इस अहम चरण को समय पर हासिल किया जा सका है। इस बुनियादी कंक्रीट परत के पूरी तरह सेट हो जाने के बाद मुख्य आरसीसी संरचना और भारी स्टील कॉलम खड़े किए जाएंगे जो पूरे बॉयलर का भार संभालेंगे। आधुनिक प्रयोगशालाओं और स्वचालित प्रणालियों के जरिए कंक्रीट की मिक्सिंग और गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा रही है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता

​यह नई 660 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल इकाई सारनी में पुरानी और बंद हो चुकी पुरानी इकाइयों के स्थान पर स्थापित की जा रही है जो कम कोयले में अधिक बिजली बनाने की आधुनिक तकनीक से लैस है। पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ यह नई तकनीक प्रदेश की भविष्य की बढ़ती बिजली की मांग को आसानी से पूरा करने में सक्षम साबित होगी। मुख्य बॉयलर क्षेत्र में इस बुनियादी कंक्रीट कार्य का पूरा होना यह दर्शाता है कि परियोजना अब तेजी से अगले चरणों की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में सिविल कार्य खत्म होते ही यह प्रोजेक्ट मैकेनिकल इरेक्शन के चरण में प्रवेश कर जाएगा जिससे बिजली उत्पादन शुरू होने की तय समयसीमा को समय पर पूरा करने की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।

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