पुणे से आया नेट हाउस फार्मिंग करने का आईडिया:- शिवेंद्र बताते हैं कि पुणे में नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि पुणे के किसान नेट हाउस तकनीक का उपयोग कर मौसम के विपरीत भी फसलें उगा रहे हैं। इसी अनुभव ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। जबलपुर आने के बाद उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और नेट हाउस फार्मिंग की तकनीकी जानकारी के साथ-साथ उपलब्ध शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। शिवेंद्र ने एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 28 लाख 50 हजार रुपये की लागत से नेट हाउस स्थापित किया। इस परियोजना में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा एमआईडीएच (मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर) योजना के अंतर्गत उन्हें 14 लाख 25 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त पहले वर्ष बीज एवं अन्य कृषि कार्यों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
महंगे बीज, लेकिन कई गुना अधिक लाभ :- शिवेंद्र बताते हैं कि ऑफ-सीजनेबल फसलों के लिए उपयोग होने वाले हाइब्रिड बीज सामान्य बीजों की तुलना में लगभग तीन गुना महंगे होते हैं। जहां सामान्य फसल का बीज सस्ता होता है, वहीं हाइब्रिड बीज की कीमत 2 से 6 रुपये या उससे अधिक होती है। हालांकि इन बीजों से उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर मिलने के कारण किसानों को अच्छा लाभ प्राप्त होता है। नेट हाउस में उन्होंने सबसे पहले कैप्सिकम (शिमला मिर्च) की खेती की। इसके बाद गेंदा फूल और खीरे की फसल ली। वर्तमान में उनके नेट हाउस में खीरे की उन्नत हाइब्रिड किस्म की खेती की जा रही है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है।