मैहर। मैहर में साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर क्क॥श्व के रिटायर्ड कर्मचारी से 22 लाख की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर मानेन्द्र सिंह को 15 दिनों तक डर और निगरानी में रखा। इस दौरान उनसे और उनकी पत्नी के नाम की चार एफडी तुड़वाई गईं। रकम एक खाते में जमा कराकर आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करा ली गई।
बताया गया है कि ग्राम इटमा कोठार निवासी मानेन्द्र सिंह लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) से टाइमकीपर पद से रिटायर्ड हैं। पिछले दिनों उनके पास एक महिला का फोन आया, उसने अपना नाम अदिति शर्मा बताते हुए खुद को दिल्ली टेलीकॉम विभाग की अधिकारी बताया। महिला ने कहा कि उनके नाम से दिल्ली में एक बैंक खाता संचालित हो रहा है, जिसका इस्तेमाल करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। महिला ने दो घंटे में दिल्ली नहीं पहुंचने पर गिरफ्तारी की धमकी दी। बुजुर्ग ने उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया तो उनकी बात खुद को आईपीएस अधिकारी बताने वाले सुनील कुमार गौतम और सीबीआई टीम लीडर बताने वाले प्रदीप सिंह से कराई गई। ठगों ने मानेन्द्र सिंह को किसी से भी बात न करने और मामले की जानकारी गुप्त रखने के निर्देश दिए। लोकलाज और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग ने किसी को कुछ नहीं बताया। इसी दौरान ठगों ने उनके बैंक खातों और फिक्स डिपॉजिट की पूरी जानकारी हासिल कर ली।
CBI का फर्जी लेटर भेजकर ट्रांसफर कराया रुपया-
मई को मानेन्द्र सिंह ने अपनी और पत्नी पुष्पा सिंह के नाम की चार एफडी तुड़वाकर 22.69 लाख एक खाते में जमा किए। अगले दिन ठगों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का फर्जी पत्र भेजा और जांच प्रक्रिया का हवाला देकर 22 लाख एक निजी कंपनी के खाते में आरटीजीएस से ट्रांसफर करा लिए।
जेवर गिरवी रखने को कहा तो हुआ शक-
पैसे भेजने के बाद भी रकम वापस नहीं आई, लेकिन ठग लगातार संपर्क में बने रहे। 23 मई को उन्होंने संपत्ति की जांच का बहाना बनाकर 8 लाख और मांगे। इतना ही नहीं, घर के जेवर गिरवी रखकर रकम जुटाने की सलाह भी दी। यहीं से मानेन्द्र सिंह को शक हुआ।