बताया गया है कि धर्मपुरी महाराज ने दशहरा पर्व पर अमरकंटक से नर्मदा परिक्रमा की शुरुआत की थी। उन्होंने संकल्प लिया है कि पूरी परिक्रमा हाथों के बल ही पूरी करेंगे। उनकी यह कठिन साधना श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
अब तक 290 किलोमीटर का सफर पूरा-
हाथों के बल चलने के कारण यात्रा की गति काफी धीमी है। बताया गया कि अब तक वे अमरकंटक से गोटेगांव क्षेत्र तक करीब 290 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं। प्रतिदिन वे करीब ढाई से तीन किलोमीटर ही आगे बढ़ पाते हैं। अनुमान है कि 3500 किलोमीटर की परिक्रमा पूरी करने में करीब चार वर्ष का समय लगेगा।
रास्ते भर श्रद्धालु ले रहे आशीर्वाद-
जहां-जहां धर्मपुरी महाराज पहुंच रहे हैं, वहां श्रद्धालु उनकी तपस्या को देखने और आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार किसी संत को हाथों के बल नर्मदा परिक्रमा करते देखा है।
एक समय भोजन, एकादशी पर भंडारा-
धर्मपुरी महाराज के साथ उनके शिष्य भी परिक्रमा में शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, महाराज दिन में केवल एक बार भोजन ग्रहण करते हैं। प्रत्येक एकादशी पर उनके पड़ाव स्थल पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। कमती इमलिया पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका स्वागत कर आशीर्वाद लिया।