जबलपुर। जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लग रहा है। नवंबर 2025 से वैध खदानें पूरी तरह बंद हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि बाजार में रेत की कोई कमी नहीं है, क्योंकि रक्षक ही भक्षक बनकर पूरी तरह खामोश बैठे हैं। जिला खनिज अधिकारी एके राय के दावों के विपरीत बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगंवा जैसे क्षेत्रों में खनन माफिया इस कदर बेलगाम हो चुका है कि वह बेखौफ होकर नदियों का सीना चीर रहा है। एनजीटी से स्वीकृत 31 खदानों के लिए करीब 5 लाख घनमीटर रेत उत्खनन का साढ़े 16 करोड़ रुपए का टेंडर जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि खदानें बंद रखकर अवैध खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि बिना किसी लिखा-पढ़ी के हर महीने करोड़ों रुपए की काली कमाई का सीधा कमीशन ऊपर बैठे आकाओं तक पहुंचता रहे।
जानबूझकर टेंडर फेल कराने का बड़ा खेल
विभाग ने लगातार तीन बार टेंडर निकाले, लेकिन शर्तें और प्रीमियम दरें इतनी पेचीदा रखी गईं कि कोई भी वैध ठेकेदार आगे न आए। अफसरों और माफिया की इस मिलीभगत का नतीजा यह है कि रात होते ही नर्मदा, हिरण और गौर नदी में पोकलेन, जेसीबी और हाइवा जैसी भारी मशीनें उतर जाती हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे रातभर ट्रैक्टर और ट्रक दौड़ रहे हैं, क्योंकि हर चक्कर के हिसाब से तय नजराना जिम्मेदार अधिकारियों की जेबों में पहुंच रहा है। अब इस महाघोटाले पर पर्दा डालने के लिए भोपाल मुख्यालय ने जबलपुर के सारे दस्तावेज तलब किए हैं।
कृत्रिम किल्लत पैदा कर जनता की जेब पर डाका
वैध खदानों को कागजों पर बंद रखकर बाजार में रेत की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है, ताकि माफिया मनमाने दाम वसूल सके। जबलपुर में आम आदमी के लिए घर बनाना अब एक सपना बनता जा रहा है, क्योंकि एक हाइवा रेत की कीमत उछलकर 28 से 30 हजार रुपए तक पहुंच गई है। वहीं पड़ोसी जिले कटनी में तो महानदी की रेत 50 हजार रुपए प्रति हाइवा बेची जा रही है। इस अवैध मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा प्रशासनिक तंत्र को चुप रखने के लिए कमीशन के तौर पर बांटा जा रहा है, जबकि आम जनता महंगाई से त्रस्त है।
नियमों में बदलाव की आड़ में नया रास्ता बनाने की तैयारी
जब अवैध खनन की गूंज राजधानी तक पहुंची, तो अब ठीकरा नियमों पर फोड़कर नया पैंतरा खेला जा रहा है। माफिया को सीधे तौर पर उपकृत करने के लिए अब उत्खनन की सीमा को 5 लाख से घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने की तैयारी चल रही है, ताकि अगली बार चहेतों को कम दाम में ठेका दिया जा सके। दिखावे के नाम पर संयुक्त टीमों ने कुछ इलाकों में अवैध रूप से स्टॉक की गई रेत को जब्त कर नदी में बहाने का नाटक तो किया है, लेकिन आज तक किसी बड़े माफिया या उसके पीछे खड़े सफेदपोश पर हाथ डालने की हिम्मत जिला प्रशासन नहीं दिखा पाया है।
