जबलपुर. रेलकर्मियों और पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर है। अब लकवा, सांस की तकलीफ, हार्ट अटैक समेत 12 गंभीर आपात स्थितियों में निजी अस्पताल में इलाज कराने पर रेलवे पूरा खर्च उठाएगा। नए नियम से पश्चिम मध्य रेलवे के करीब 60 हजार हजार कर्मचारी और हजारों पेंशनर्स को सीधा फायदा मिलेगा।
बोर्ड के हालिया आदेश के मुताबिक, दिल का दौरा, अचानक बेहोशी, लकवा, सांस लेने में दिक्कत, दुर्घटना, तेज दर्द को मेडिकल इमरजेंसी में रखा गया है। इसके अलावा प्रसव, रक्तस्राव, डिहाइड्रेशन, सांप या जहरीले कीड़े का काटना, जलना या बिजली का झटका लगने पर भी कर्मचारी सीधे निजी अस्पताल जा सकेंगे। डॉक्टर की ओर से प्रमाणित कोई भी जीवन-घातक स्थिति इस दायरे में आएगी।
नहीं काटना होगा अस्पतालों के चक्कर
अब तत्काल इलाज के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकारी अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वह निकटतम गैर-रेलवे सरकारी या निजी अस्पताल में इलाज करा सकेंगे और रेलवे बिल की प्रतिपूर्ति करेगा। नए नियम में तीव्र कोरोनरी सिंड्रोम, गर्भावस्था से जुड़ी आपात स्थिति, गंभीर पेट दर्द के साथ उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन को भी शामिल किया गया है। इससे रेलवे परिवार को समय पर बेहतर इलाज मिल सके.
