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एक्टर-मॉडल से साध्वी बनी हर्षा रिछारिया जबलपुर में नर्मदा तट पर करेेंगी 11 दिन की साधना, मौन व्रत, अन्न का भी त्याग

जबलपुर. संस्कारधानी जबलपुर के पावन नर्मदा तट ग्वारीघाट पहुंचीं एक्टर और मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने मां नर्मदा में स्नान कर विधिवत पूजा-अर्चना की और 11 दिवसीय विशेष साधना का संकल्प लिया. इस दौरान वे मौन व्रत का पालन करेंगी, अन्न का त्याग करेंगी, जूते-चप्पल नहीं पहनेंगी और नर्मदा तट पर एकांत में रहकर ध्यान और साधना करेंगी.

हर्षा रिछारिया ने बताया कि यह साधना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम है. इस साधना का मुख्य उद्देश्य लव जिहाद से बेटियों को बचाना और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना है. उनका कहना है कि वर्तमान समय में व्यक्ति बाहरी दुनिया, सोशल मीडिया और भौतिक आकर्षणों में इतना उलझ गया है कि स्वयं से जुडऩे का समय नहीं निकाल पाता. ऐसे में मौन और एकांत साधना व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करती है.

विश्व शांति, भारत की तरक्की की कामना

उन्होंने कहा कि साधना से आध्यात्मिक विकास करना चाहती हैं है. इसके साथ ही वे विश्व शांति, भारत की आर्थिक स्थिरता और समाज में सकारात्मक बदलाव की कामना भी कर रही हैं. हर्षा ने बताया कि उनके कई व्यक्तिगत और सामाजिक संकल्प हैं, जिनके लिए वे यह तपस्या कर रही हैं. साध्वी हर्षा के अनुसार, वर्तमान समय में दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर दिखाई देता है. बढ़ती महंगाई और आर्थिक चुनौतियों का प्रभाव आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है. उनकी साधना का एक उद्देश्य विश्व में शांति स्थापित होने और लोगों के जीवन में स्थिरता आने की प्रार्थना करना भी है.

उन्होंने यह भी कहा कि मौन साधना व्यक्ति के मन और शरीर दोनों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है. जब व्यक्ति कुछ समय के लिए बाहरी शोर-शराबे से दूर होकर केवल ईश्वर और आत्मा के साथ संवाद करता है, तब मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक शांति का अनुभव होता है. उनके अनुसार यह प्रक्रिया शरीर और मन दोनों को शुद्ध करने का कार्य करती है.

नर्मदा तट से गहरा संबंध रहा है

ग्वारीघाट और मां नर्मदा के प्रति अपने विशेष लगाव का जिक्र करते हुए हर्षा ने बताया कि वर्ष 2012 से उनका नर्मदा तट से गहरा संबंध रहा है. जीवन के कठिन दौर में उन्हें मां नर्मदा से आध्यात्मिक शक्ति और मार्गदर्शन मिला, इसलिए उन्होंने इस विशेष साधना के लिए ग्वारीघाट को चुना. हर्षा रिछारिया ने बताया कि 15 जून को उनकी 11 दिवसीय साधना पूर्ण होगी. इसके बाद वे ग्वारीघाट लौटकर मां नर्मदा की आरती करेंगी और प्रसाद वितरण के साथ साधना का समापन करेंगी.


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