जबलपुर। जबलपुर के बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे में लापता हुए चार लोगों की तलाश में आज सुबह 6 से एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें फिर जुट गई। तेज हवार व बांध में उठ रही लहरों के चलते रेस्क्यू में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी टीमें जुटी हुई है। वहीं मौके पर प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी मौजूद है।
अधिकारियों का कहना है कि तलाश में जुटी टीमों ने लापता लोगों की तलाश के लिए दायरा और बढ़ा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तेज हवा के कारण छोटी वोट को बीच बीच रोकी जा रही है, रेस्क्यू अभियान बड़े ही सुरक्षित तरीके से चलाया जा रहा है। वहीं पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि घटना स्थल पूरी तरह पथरीला है, इसलिए यहां मगरमच्छ नहीं देखे गए हैं, क्योंकि वे आमतौर पर कीचड़ वाले स्थान पर रहते हैं। बरगी बांध में मगरमच्छ हो सकते हैं, लेकिन वे घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर हैं। जहां क्रूज डूबा है, वहां पहले कभी मगरमच्छ नहीं देखे गए और न ही स्थानीय लोगों ने ऐसा सुना है। हादसे को हुए 48 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं। अब भी 3 बच्चों सहित चार लापता लोगों का पता नहीं चल सका है। जानकारी के मुताबिक सर्चिंग में नई टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। कोशिश करेंगे कि नेट बिछाई जाए जिससे कोई बॉडी होगी तो वह फंसकर बाहर आ जाएगी।
दोनों शवों को दूसरे कार्गो विमान से भेजा गया-
जबलपुर से त्रिचि (तमिलनाडु) के लिए उड़ान भरने वाले दो कार्गो विमानों में से एक में तकनीकी खराबी आ गई। इसके चलते दोनों शवों को दूसरे कार्गो विमान से 10 साल के बच्चे और उसके मामा के साथ भेजा गया है। चार लोगों को दूसरी फ्लाइट से भेजने की तैयारी प्रशासन कर रहा है।
डैम की लहरें समुद्र जैसी है-
एमपी टूरिज्म बोर्ड में एडवाइजर कमांडेंट राजेंद्र निगम ने बताया कि 2006 में इसी क्रूज को डिजाइन किया गया था। यह बेहतरीन टेक्नोलॉजी का क्रूज था। जिसमें दोनों तरफ नीचे लगे हल्क ज्यादा थे, इसलिए यह टर्न नहीं कर पाया। डैम में लहरों की स्थिति समुद्र, खासकर अरब सागर की लहरों जैसी थी। आगे उन्होंने बताया कि पूरे एमपी और देश में तेज हवा चलने पर नाव नहीं चलाने की एडवाइजरी जारी करने का प्लान बनाया जा रहा है।