बताया गया है कि तीन फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद कोतवाली पुलिस ने भोपाल और ग्वालियर में दबिश दी, जिसमें भोपाल से एक अहम आरोपी को पकड़ा है। यही युवक फर्जी डिग्री तैयार कराने और नौकरी दिलाने के पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। डिग्री उपलब्ध कराने का काम ग्वालियर का एक MBBS डॉक्टर करता था, जो पुलिस को अभी तक नहीं मिला है। अब तक इस मामले में आरोपियों की संख्या छह हो गई है।
फर्जी डिग्रियों का नेटवर्क-
पुलिस जांच में सामने आया है कि ग्वालियर के एक डॉक्टर ने भोपाल निवासी संदीप के साथ मिलकर फर्जी अंकसूची औरMBBS डिग्री बनाने का नेटवर्क खड़ा किया था। सबसे पहले मुरैना निवासी अजय मौर्य को फर्जी डिग्री बेची गई। अजय मौर्य इस फर्जी डिग्री की मदद से जबलपुर के संजीवनी क्लीनिक में करीब दो साल से कार्यरत रहा। इस गिरोह का खुलासा दमोह से हुआ है, जहां पर दो फर्जी डाक्टरों को पुलिस ने पकड़ा, इसके बाद सारा मामला प्याज के छिलकों की मानिंद खुलता चला गया।
