नई दिल्ली. रेलवे की व्यवस्था में आखिरकार वह बदलाव लागू हो गया, जिसका इंतजार दो दशक से ज्यादा समय से था। भारतीय रेलवे ने यार्ड मास्टर और ट्रैफिक इंस्पेक्टर जैसे पुराने पदनाम खत्म कर उन्हें स्टेशन मास्टर कैडर में शामिल कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि इन पदों का विलय वर्ष 2003 में ही कर दिया गया था, लेकिन फील्ड ड्यूटी और डिजिटल सिस्टम एचआरएमएस (मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली) में पुराने नाम अब तक बने हुए थे। देरी का असर कर्मचारियों की सुविधाओं और प्रमोशन पर पड़ रहा था। वर्दी भत्ता, पदोन्नति नियम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अलग-अलग पहचान परेशानी का कारण बनी हुई थी।
यह होगा लाभ
अब रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद सभी कर्मचारियों की पहचान एक समान होगी और वे स्टेशन मास्टर कैडर की मुख्यधारा में शामिल होकर राजपत्रित अधिकारी बनने का अवसर पा सकेंगे। अब एक ही अधिकारी को जरूरत के अनुसार स्टेशन संचालन, यार्ड प्रबंधन या निरीक्षण ड्यूटी सौंपी जा सकेगी।
ये काम करना पड़ता है
स्टेशन मास्टर रेलवे स्टेशनों पर परिचालन संभालते हैं। यार्ड मास्टर बड़े जंक्शनों, टर्मिनल स्टेशनों और मालगाड़ी के मार्शलिंग यार्डों में तैनात होते हैं। ट्रैफिक इंस्पेक्टर एक सेक्शन के अंदर सुपरवाइजरी पद है। पहले ये तीनों अलग-अलग पॉकेट में बंटे हुए थे। इसमें ट्रैफिक इंस्पेक्टर प्रमोशन पाकर भी सेफ्टी या इंस्पेक्शन शाखा में ही रह जाता था, जबकि यार्ड मास्टर प्रमोशन पाकर चीफ यार्ड मास्टर ही बन पाता था, लेकिन अब पदोन्नति मिलने पर स्टेशन मास्टर से स्टेशन अधीक्षक और फिर सहायक परिचालक प्रबंधक (ग्रुप बी राजपत्रित), मंडल परिचालन प्रबंधक (ग्रुप ए सीनियर स्केल) और वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (ग्रुप ए जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव) के पद पर पहुंचा जा सकेगा।
रेलवे बोर्ड का ये है आदेश
रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (पे कमीशन व एचआरएमएस) जया कुमार ने इसके लिए 15 मई को आदेश जारी कर दिया है। अब कैडर विसंगतियां दूर होने से रेलवे के पास लगभग 40 हजार स्टेशन मास्टर का एक एकीकृत कार्यबल होगा।
