नई दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने कक्षा 9 और 10 के भाषा पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है. बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के तहत नई भाषा व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. यह नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगा.
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को नए भाषा पाठ्यक्रम और सीखने के लक्ष्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. बोर्ड का कहना है कि नई व्यवस्था से छात्रों की पढऩे, लिखने, व्याकरण और बोलने की क्षमता बेहतर होगी. साथ ही छात्रों में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के प्रति समझ भी मजबूत होगी.
अब पढऩी होंगी तीन भाषाएं
सीबीएसई के नए नियम के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा. इन भाषाओं को आर1, आर2 और आर3 नाम दिया गया है. बोर्ड ने साफ कहा है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी हैं.
आर1 छात्र की मुख्य भाषा होगी.
आर2 दूसरी भाषा होगी.
आर3 तीसरी भाषा होगी, जिसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.
कक्षा 10 में नहीं होगी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा
हालांकि छात्रों को तीसरी भाषा पढऩी होगी, लेकिन कक्षा 10 में क्र3 यानी तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं ली जाएगी. यह व्यवस्था धीरे-धीरे लागू की जाएगी और साल 2030-31 तक पूरी तरह से कक्षा 10 तक लागू हो जाएगी.
विदेशी भाषा चुनने पर ये नियम
नई नीति के तहत छात्र विदेशी भाषा भी चुन सकते हैं. लेकिन अगर कोई छात्र विदेशी भाषा लेता है, तब भी बाकी दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होना जरूरी रहेंगी. विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी पढ़ा जा सकेगा.
किन भाषाओं को मिलेगा स्थान?
सीबीएसई ने बताया कि भाषा सूची में हिन्दी, अंग्रेजी और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं समेत कुल 42 से ज्यादा भारतीय भाषाएं शामिल हैं. इसके अलावा कई क्षेत्रीय और विदेशी भाषाएं भी स्कूलों में पढ़ाई जाएंगी.
