जबलपुर। बरगी बांध में हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के दौरान एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी और बचाव कार्य में सक्रिय रहे बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष 14 बिंदुओं की लिखित शिकायत और एक पेनड्राइव सौंपकर कई संगीन आरोप लगाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि हादसे के बाद मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस में चालक के अलावा कोई भी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था। इस गंभीर लापरवाही के कारण पानी से सुरक्षित निकाले गए कई घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार, सीपीआर और ऑक्सीजन नहीं मिल सकी, जिससे कुछ लोगों की सांसें चलने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। यह दुर्घटना 30 अप्रैल की शाम करीब 5:30 बजे हुई थी, जब मैकल रिसॉर्ट से 41 पर्यटकों को लेकर निकला क्रूज बैकवाटर में डूब गया था। इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की असमय मौत हो गई थी, जबकि 28 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था।
जीवन रक्षक इंतजामों की कमी से तड़पते रहे लोग
जांच आयोग को सौंपे गए साक्ष्यों के अनुसार एम्बुलेंस चालक ने स्वयं अकेले आने की बात स्वीकार की है, जिसका वीडियो फुटेज भी प्रमाण के तौर पर आयोग को प्रस्तुत किया गया है। यदि घटना स्थल पर समय रहते बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा दी जातीं, तो मृतकों का यह बड़ा आंकड़ा काफी कम किया जा सकता था। शिकायतकर्ता ने राहत कार्यों में हुई भारी देरी, एसडीआरएफ की टीम के विफलतापूर्वक देर से पहुंचने और मौके पर प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन दल तथा आधुनिक मोटर बोट की अनुपलब्धता को लेकर भी कई तीखे सवाल उठाए हैं। प्रशासनिक तंत्र की इस सुस्ती के कारण पानी से निकाले गए लोगों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका।
टिकट के पैसे वसूलने के बाद भी यात्रियों का नहीं था कोई बीमा
इस जल हादसे में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज आरोप है। क्रूज पर सवार यात्रियों से प्रबंधन द्वारा बकायदा पूरा टिकट शुल्क वसूला गया था, लेकिन इसके बावजूद उनका कोई सामूहिक बीमा नहीं कराया गया था। क्रूज के भीतर आपातकालीन संसाधनों और लाइफ जैकेट जैसे पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी पाई गई। इस लापरवाही ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
सरकार को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट
वर्तमान में न्यायिक जांच आयोग पर्यटन विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक, रिसॉर्ट प्रबंधक और क्रूज चालक के बयान पूरी तरह दर्ज कर चुका है। आयोग को अब 60 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपनी है। शिकायतकर्ता नीरज मिश्रा ने हादसे के शिकार हुए मृतकों के पीड़ित परिजनों के लिए उचित सरकारी मुआवजे और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।
