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लोक अदालत में पति-पत्नी एक हुए, एक दूसरे को फिर से पहनाई माला, लाडली बहना योजना के रुपयों को लेकर हुआ था झगड़ा, अलग रहने लगे थे

दमोह। दमोह जिला न्यायालय में आज आयोजित नेशनल लोक अदालत में  पति-पत्नी फिर एक हो गए। कुटुंब न्यायालय में न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से राजीनामा कर लिया।

                                सुनीता प्रजापति की शादी दस साल पहले बारी गांव के मुकेश प्रजापति से हुई थी। उनके दो बच्चे हैं। सुनीता के अनुसार यह विवाद लाडली बहना योजना के पैसों को लेकर शुरू हुआ था। पत्नी सुनीता प्रजापति को योजना के तहत राशि मिलती थी। उनके इलाज के खर्च को लेकर पति मुकेश प्रजापति ने पैसे देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।  इस दौरान पति ने उनके साथ मारपीट की थीए जिसके बाद उन्होंने न्यायालय में मामला दर्ज कराया था। कुटुंब न्यायालय के न्यायाधीश मोहम्मद अजहर ने बताया कि महिला को लाडली बहना योजना का पैसा मिलता था और उसके इलाज का खर्च भी था। पति द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर यह विवाद शुरू हुआ। जिसमें मारपीट की घटना भी हुई थी। दोनों का विवाह 2016 में हुआ था। लोक अदालत में दोनों ने छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज कर साथ रहने का फैसला किया। राजीनामा होने पर सुनीता प्रजापति ने खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सभी को छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना चाहिए ताकि परिवार में बिखराव न हो। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अधीक्षक एवं जिला प्रिंसिपल सुभाष सोलंकीए लीगल कौंसिल अधिवक्ता मनीष नगाइचए जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कमलेश भारद्वाज सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।


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