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अमृत भारत योजना में गड़बड़ी, पश्चिम मध्य रेलवे के 17 ठेकेदारों को हुआ 2.36 करोड़ का ज्यादा भुगतान,अफसर नपेंगे



जबलपुर मुख्यालय की विजिलेंस जांच में हुआ करोड़ों के खेल का खुलासा

जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर मुख्यालय के विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी वित्तीय अनियमितता का पर्दाफाश किया है। अमृत भारत स्टेशन पुनर्विकास योजना और ओपन लाइन के कार्यों में लगे 17 ठेकेदारों को निर्धारित राशि से 2 करोड़ 36 लाख रुपए अधिक बांट दिए गए। सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया है। मुख्यालय ने इस अतिरिक्त भुगतान की वसूली के लिए कोटा मंडल के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। हालांकि इस मामले में रेलवे और ठेकेदारों के बीच ठन गई है और मामला न्यायालय तक पहुँचने के आसार बन रहे हैं।

एक ही काम की दो अलग दरों ने उलझाया मामला

​इस पूरे विवाद की जड़ टेंडर दस्तावेजों में दी गई दरों में विसंगति है। रेलवे ने अमृत भारत योजना के तहत स्टेशनों के सौन्दर्यीकरण के लिए लाल पत्थर, पत्थर की जालियां और पुट्टी का काम करवाया था। टेंडर डॉक्युमेंट्स में इन मदों के लिए शेड्यूल और नॉन शेड्यूल वर्ग में अलग-अलग दरें अंकित थीं। ठेकेदारों ने मौके का फायदा उठाते हुए ऊंची दरों वाले कॉलम के अनुसार अपनी निविदाएं भरीं। रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों ने भी बिना किसी आपत्ति के इन बिलों को पास कर दिया और ठेकेदारों के खातों में करोड़ों रुपए पहुँच गए।

इन प्रमुख स्टेशनों पर हुआ अतिरिक्त भुगतान

​विजिलेंस की जांच में पाया गया कि बूंदी, झालावाड़ सिटी, भवानीमंडी, गरोठ, विक्रमगढ़ आलोट और हिंडौन सिटी स्टेशनों पर करीब 139 लाख रुपए का ज्यादा भुगतान हुआ है। इसके अलावा गंगापुर सिटी, मांडलगढ़, शामगढ़, सवाई माधोपुर, रामगंजमंडी, बारां, भरतपुर, बयाना और छबड़ा गुगोर स्टेशनों सहित कुछ ओपन लाइन कार्यों में भी 97 लाख 77 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि दी गई। कुल मिलाकर 2 करोड़ 36 लाख रुपए का चूना सरकारी खजाने को लगा है। इसमें कोटा डीआरएम ऑफिस के तीन मंजिला भवन की बाहरी दीवारों पर लगाए गए लाल पत्थरों का काम भी शामिल है।

वसूली के आदेश पर ठेकेदारों ने दी कोर्ट की चेतावनी

​सतर्कता विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाल पत्थर के काम के लिए कम रेट वाली नॉन शेड्यूल दर का उपयोग किया जाना चाहिए था। अब रेलवे प्रशासन ठेकेदारों के वर्तमान या भविष्य के बिलों से इस राशि को काटने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर ठेकेदारों ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने वही दरें भरी थीं जो रेलवे के दस्तावेजों में मौजूद थीं। उनका तर्क है कि अगर एक ही काम की दो दरें थीं, तो यह रेलवे की तकनीकी गलती है। ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जबरन वसूली की गई तो वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

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