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जबलपुर आईटीआई में गूंजा नशा मुक्ति का संकल्प, छात्रों ने ली तम्बाकू से दूर रहने की शपथ




जबलपुर। विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 2026 के उपलक्ष्य में बुधवार को नेशनल टोबैको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत संभागीय आईटीआई जबलपुर में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को तम्बाकू एवं निकोटीन उत्पादों के जानलेवा दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करना तथा उन्हें नशा मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था। इस मौके पर राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. प्रशांत दुबे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ष 2026 के लिए अपील को उजागर करना – निकोटीन और तम्बाकू की लत का मुकाबला थीम तय की गई है। कार्यक्रम में कोटपा 2003 के कड़े नियमों की जानकारी देते हुए सभी विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई।

​युवाओं को जाल में फंसा रही हैं तम्बाकू कंपनियां

​कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आजकल तम्बाकू और निकोटीन बनाने वाली कंपनियां युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए नए-नए और आकर्षक हथकंडों का इस्तेमाल कर रही हैं। आधुनिक दौर में ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और अलग-अलग फ्लेवर वाले उत्पादों के जरिए कम उम्र के किशोरों को नशे की लत की तरफ धकेला जा रहा है। भ्रामक विज्ञापनों और आधुनिक दिखावे के कारण नई पीढ़ी इसकी गिरफ्त में आ रही है, जो पूरे समाज और जनस्वास्थ्य के लिए एक बेहद गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस वर्ष की थीम का मुख्य लक्ष्य भी यही है कि इन कंपनियों की चालबाजी और भ्रामक रणनीतियों को दुनिया के सामने उजागर किया जाए ताकि मासूम युवाओं को इनके चंगुल से सुरक्षित बचाया जा सके।

​गंभीर बीमारियों का खतरा और कोटपा कानून की जानकारी

​जागरूकता अभियान के दौरान छात्र-छात्राओं को विस्तार से बताया गया कि तम्बाकू और सिगरेट के सेवन से कैंसर, दिल का दौरा, फेफड़ों की गंभीर बीमारियां और कई अन्य जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इसके साथ ही कार्यक्रम में सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम यानी कोटपा 2003 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सचेत किया गया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना कानूनी रूप से पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। कार्यक्रम के अंत में संभागीय आईटीआई के सभी विद्यार्थियों ने जीवन में कभी भी तम्बाकू उत्पादों का सेवन न करने की शपथ ली और अपने आसपास के समाज में भी इसके खिलाफ अलख जगाने का संकल्प लिया।

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