जबलपुर। पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सुरक्षा इंतजामों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब एक पीड़ित महिला ने परिसर के अंदर ही दवाइयां खाकर खुदकुशी करने की कोशिश की। अधारताल थाना क्षेत्र के धनी कुटिया की रहने वाली 35 वर्षीय अंजू पांडे अपनी 3-4 साल की मासूम बच्ची को गोद में लेकर न्याय मांगने मुख्यालय पहुंची थी। महिला का आरोप है कि वह लंबे समय से मोहल्ले के लोगों की प्रताड़ना झेल रही है और स्थानीय थाने में सुनवाई न होने के कारण उसने यह कदम उठाया।
थाने में सुनवाई न होने से क्षुब्ध थी पीड़िता
अंजू पांडे ने अस्पताल में बताया कि क्षेत्र के कुछ दबंग उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर रहे हैं। इस मामले की शिकायत लेकर वह कई बार अधारताल थाने गई, लेकिन वहां के पुलिस कर्मियों ने उसकी बात को अनसुना कर दिया। पुलिस की इसी टालमटोल वाली कार्यशैली से परेशान होकर वह एसपी ऑफिस पहुंची थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब महिला कार्यालय परिसर में खड़ी थी तभी उसने अचानक जेब से निकालकर अस्थमा की 3 से 4 गोलियां निगल लीं। घटना के बाद वहां मौजूद पुलिस कर्मियों में अफरातफरी मच गई और तत्काल महिला को वाहन से विक्टोरिया जिला अस्पताल ले जाया गया।
चिकित्सकों ने महिला की स्थिति बताई स्थिर
विक्टोरिया अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच और उपचार के बाद स्पष्ट किया है कि अंजू पांडे फिलहाल खतरे से बाहर है। डॉक्टरों का कहना है कि अधिक मात्रा में दवा खाने के कारण उसे घबराहट हुई थी लेकिन दवाओं की प्रकृति प्राणघातक नहीं थी। इधर पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि अधारताल थाने में महिला की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पुलिस अब प्रताड़ना के आरोपों की सच्चाई का पता लगाने के लिए मोहल्ले के लोगों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।
