नई दिल्ली. रेलवे ने प्रचंड गर्मी और लू के अलर्ट के बीच लोहे की पटरियों के फैलने और उनके टेढ़े होने (बकलिंग) का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए दोपहर में (12 से शाम चार बजे के बीच) पटरियों पर हर तरह की मरम्मत पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
भीषण दोपहर की धूप में जब पटरियां सबसे ज्यादा तप रही होती हैं, उस वक्त उनके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या भारी मरम्मत का काम पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।अत्यधिक गर्मी में रेल पटरी यानी फैला हुआ लोहा बेहद संवेदनशील होता है, ऐसे में नट-बोल्ट खोलने या हथौड़ा चलाने से पटरी अपनी जगह से अचानक छिटक सकती है, जो किसी बड़े रेल हादसे का सबब बन सकता है।
रेल लाइन पर तापमान 10 से 15 डिसे अधिक रहता है
रेलवे विशेषज्ञों के मुताबिक गर्मी के इन दिनों में जब तापमान देश के अलग-अलग भागों में 45 से 48 डिसे तक दर्ज किया जा रहा है, ऐसे में रेल लाइनों (ट्रेक) का तापमान इससे 10 से 15 डिसे अधिक रहता है. इसका कारण पांतें व गिट्टियों के मिलान से उत्पन्न टेम्परेचर है. ऐसे समय में खौलती पांतों पर काम करना काफी मुश्किल भरा होता है.
सुबह या शाम 4 बजे के बाद होगा काम
इसी खतरे को देखते हुए अब मरम्मत का काम या तो सुबह तड़के निपटाया जाएगा या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद। दिन में पटरियों पर कोई भी ऐसा काम नहीं होगा जिससे उनकी स्थिरता प्रभावित हो। सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के स्थानीय तापमान के अनुसार काम के घंटों में बदलाव करें। इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य करोड़ों रेल यात्रियों के सफर को सुरक्षित बनाना है। साथ ही, इससे तपती धूप में पटरियों पर काम करने वाले हजारों गैंगमैन और ट्रैकमेन को भी जानलेवा गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।
