जबलपुर। भारतीय रेलवे ने रेल पटरियों, स्टेशन परिसरों या ट्रेनों के भीतर मिलने वाले लावारिस शवों के संरक्षण और उनके सम्मानजनक अंतिम संस्कार को लेकर एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड के आईजी प्रशासन महेश्वर सिंह द्वारा जारी आदेश के तहत अब प्रति शव खर्च की जाने वाली अनुग्रह राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दिया गया है। बोर्ड द्वारा लिया गया यह मानवीय निर्णय तत्काल प्रभाव से पश्चिम मध्य रेलवे समेत देश के सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों, प्रधान वित्त सलाहकारों और मुख्य सुरक्षा आयुक्तों को भेजकर लागू कर दिया गया है। इस फैसले से राजकीय रेलवे पुलिस और स्थानीय रेलवे प्रशासन को क्षेत्रीय स्तर पर लावारिस शवों के निस्तारण की कानूनी प्रक्रियाओं, कफन सामग्री और परिवहन को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी।
बढ़ती महंगाई के कारण पुरानी दरें पड़ रही थीं कम
रेलवे संपत्ति की सीमा के भीतर मिलने वाले अज्ञात व लावारिस शवों के संरक्षण और अंतिम संस्कार के दौरान अक्सर फंड की कमी सामने आ रही थी। इस कार्य के लिए तय की गई पुरानी दरें काफी समय पहले निर्धारित की गई थीं। बीते वर्षों में बाजार में कफन की सामग्री, परिवहन और अंतिम संस्कार से जुड़ी अन्य सेवाओं के दाम काफी बढ़ चुके हैं। इसी व्यावहारिक समस्या को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय के वित्त निदेशालय से विस्तृत विचार-विमर्श और सहमति मिलने के बाद इस बजट को बढ़ाने का अंतिम निर्णय लिया गया है।
आईजी प्रशासन ने जारी किए सख्त निर्देश
इस महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए रेलवे बोर्ड के आईजी प्रशासन महेश्वर सिंह ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस बढ़ी हुई राशि की उपलब्धता में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए। फंड में 2,000 रुपये की यह बढ़ोतरी जमीनी स्तर पर किसी भी लावारिस मृतक को गरिमापूर्ण विदाई देने में मील का पत्थर साबित होगी। पश्चिम मध्य रेलवे समेत सभी मंडलों ने इस आदेश के तहत फंड का आवंटन स्थानीय चौकियों को ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है।
मानवाधिकारों और मानवीय दृष्टिकोण को मिलेगा बल
अक्सर रेल हादसों, प्राकृतिक मौतों या अन्य आपराधिक घटनाओं के कारण रेलवे परिसरों में शव बरामद होते हैं। शिनाख्त न होने की स्थिति में इन शवों का अंतिम संस्कार कराना कानूनन राजकीय रेलवे पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की संयुक्त निगरानी में स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। अब बजट बढ़ने से इन लावारिस शवों को ढंकने के लिए इस्तेमाल होने वाले कफन, कफन सामग्री और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक मानवीय, गरिमापूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
