जबलपुर। एमपी के जबलपुर में जस्टिस को फोन लगाने के मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक गुरुवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। तीन सप्ताह पहले कोर्ट में पेश होकर विधायक ने कहा था कि जस्टिस का नंबर उनसे गलती से डायल हो गया था। उन्होंने अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से छूट भी मांगी थी, लेकिन अदालत ने यह मांग खारिज कर दी थी। ऐसे में संजय पाठक कोर्ट को आज अनिवार्यत: कोर्ट में उपस्थित होना था।
संजय पाठक के उपस्थित होने के बाद मामले की सुनवाई 15 जुलाई तक के लिए बढ़ गई है। अब 15 जुलाई को दोपहर ढाई बजे मामले की सुनवाई होगी। संजय पाठक दोपहर 3:00 बजे कोर्ट पहुंच गए थे। उसके बाद फिर शाम 5:00 बजे तक मौजूद रहे। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। कोर्ट ने व्हिसलब्लोअर आशुतोष दीक्षित को भी मामले में कोर्ट की सहायता करने की अनुमति दी।
ओपन कोर्ट में जस्टिस ने किया था खुलासा-
पूरा विवाद 1 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब जस्टिस विशाल मिश्रा ने ओपन कोर्ट में कहा था कि एक विधायक ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। उस समय उनके समक्ष विधायक परिवार से जुड़े खनन मामले में दायर याचिका की सुनवाई चल रही थी। न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जस्टिस मिश्रा ने खुद को उस केस से अलग कर लिया था। इसके बाद कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने मामले में अलग याचिका दायर की। 2 अप्रैल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यह न्यायपालिका की गरिमा से जुड़ा गंभीर मामला है और प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना बनती है। इसके बाद विधायक संजय पाठक को नोटिस जारी किया गया था।
एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया-
हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में संजय पाठक ने कहा कि उनसे गलती से जस्टिस विशाल मिश्रा का नंबर डायल हो गया था और एक घंटी बजते ही कॉल काट दिया गया। हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया था कि विधायक की व्यक्तिगत उपस्थिति के बिना हलफनामे पर विचार नहीं किया जाएगा।