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फनकार साज जबलपुरी स्मृति समारोह में गूंजीं गजलें, उमड़े शहर के रचनाकार



जबलपुर। संस्था वर्तिका द्वारा गजलकार स्वर्गीय साज जबलपुरी के पुण्य स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रतुल श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मशहूर जादूगर एसके निगम और विशिष्ट अतिथि के रूप में विजय जायसवाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक विजय नेमा रहे। अतिथियों ने स्वर्गीय साज जबलपुरी को बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी और एक बेहतरीन कवि व गजलकार बताया, जिनकी गजलों को अनूप जलोटा और चंदन दास जैसे दिग्गज गायकों ने आवाज दी है और जिनका प्रसारण दूरदर्शन नई दिल्ली से भी हो चुका है। वर्तिका के संस्थापक साज जबलपुरी ने हमेशा नए रचनाकारों को मंच दिया। संस्था अध्यक्ष संतोष नेमा ने उनके सरल स्वभाव की सराहना की। इस दौरान सभी ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का संचालन राजेश पाठक प्रवीण ने किया।

​कवियों ने बिखेरे रचनाओं के रंग

​द्वितीय सत्र में आयोजित काव्यांजलि के दौरान उपस्थित कवियों ने अपनी बेहतरीन रचनाओं से समां बांध दिया। इस काव्य गोष्ठी में दीपक तिवारी, प्रतिमा श्रीवास्तव, विवेक गुप्ता, प्रेमचंद पालीवाल, प्रकाश ठाकुर, ज्योति मिश्रा, ज्योति प्यासी, प्रीति नामदेव, तरुणा खरे, डॉ सलमा जमाल, नीतू सिंह, वर्षा तिवारी रैनी, अनूदित साज, वसंत शर्मा, विजय बागरी और रजनी कोठारी ने काव्य पाठ किया।

​ मैं एक रूह हूं पहचान जिस्म है...

​कार्यक्रम में पढ़ी गईं कुछ गजलें जैसे, मैं एक रूह हूं पहचान जिस्म है जिसकी, मुश्किल से तुम मिले थे हजारों हजार में, सौ रंग घुल गए थे फस्ले बहार में, दिल है सादा मगर राज है गहरे कितने, एक ही शक्ल में पोशीदा हैं चेहरे कितने और ये नई तर्जे सितम है कि वो नश्तर लेकर नापने बैठे हैं कि जख्म है गहरे कितने, श्रोताओं द्वारा खूब सराही गईं। इस मौके पर विमला श्रीवास्तव, ममता जायसवाल, राजीव गुप्ता, महब जबलपूरी, सलिल तिवारी, रमाकांत गौतम, भीम सिंह दीवान, मोती शिवहरे, भारती अनूदित साज और शांति रॉय सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। अंत में आभार प्रदर्शन रजनी कोठारी ने किया।

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