कलेक्टर रेट से भी कम वेतन पर काम कर रहे आउटसोर्स कर्मी,उपस्थिति भेजने के बाद भी एजेंसियां नहीं दे रही हैं मानदेय
जबलपुर। विभिन्न सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य, राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, शिक्षा और लोक निर्माण विभाग सहित कई अन्य कार्यालयों के सैकड़ों कर्मचारियों को पिछले 3 माह से वेतन नहीं मिला है। संबंधित विभागों के अधिकारी इन आउटसोर्स कर्मियों से नियमित शासकीय कार्य तो करा रहे हैं, लेकिन उनके मानदेय भुगतान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। अल्प आय वाले ये कर्मचारी आर्थिक तंगी के कारण दैनिक जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ साबित हो रहे हैं।
वेतन न मिलने से परिवारों के सामने गहराया आर्थिक संकट
मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष अटल उपाध्याय के अनुसार वेतन के अभाव में ऑपरेटरों के बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है और स्टेशनरी का बकाया भी बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि बीमार परिजनों के लिए दवाइयां भी उधार लेनी पड़ रही हैं। कार्यालयों द्वारा हर महीने समय पर उपस्थिति रिपोर्ट ठेका कंपनियों को ई-मेल के माध्यम से भेज दी जाती है, इसके बावजूद एजेंसियां भुगतान में देरी कर रही हैं। संघ ने अधिकारियों को यह सुझाव भी दिया है कि संकट को देखते हुए इन कर्मचारियों को अग्रिम राशि प्रदान की जाए।
कलेक्टर दर से कम मजदूरी और अधिक कार्य लेने का आरोप
कर्मचारी संघ ने ठेका कंपनियों पर शोषण का आरोप लगाते हुए कहा है कि इन कर्मियों को जिले में निर्धारित कलेक्टर रेट के बराबर भी मानदेय नहीं दिया जा रहा है। भुगतान न होने के बाद भी उनसे तय समय से ज्यादा काम लिया जा रहा है। संगठन का मानना है कि यदि ये ऑपरेटर कार्य बंद कर दें, तो विभागों के महत्वपूर्ण काम ठप हो सकते हैं। इस समस्या को लेकर अटल उपाध्याय, देवेंद्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, तपन मोदी, सुनील पचौरी, अर्जुन सोमवंशी, नरेश शुक्ला, योगेन्द्र मिश्रा, बृजेश मिश्रा, अरुण पटेल, राजू मस्के, बिपिन शर्मा, राम शंकर शुक्ला, विनय नामदेव, सतीश उपाध्याय, नेतराम झारियां, रवि बांगड़, सुशील गुप्ता और राजाराम डेहरिया ने तत्काल लंबित वेतन भुगतान की मांग की है।
