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ओएफके जबलपुर में वेतन घोटाला या सॉफ्टवेयर की बड़ी चूक,कई सवाल खड़े हुए



जबलपुर। आयुध निर्माणी खमरिया में नया ईआरपी सिस्टम लागू होने के बाद कर्मचारियों के वेतन को लेकर बड़ी अव्यवस्था फैल गई है। मुनिशंस इंडिया लिमिटेड द्वारा कामकाज को डिजिटल बनाने के लिए शुरू किए गए इस सॉफ्टवेयर ने पारदर्शी व्यवस्था के बजाय नई मुसीबतें पैदा कर दी हैं। 7 मई को वेतन वितरण के दौरान तकनीकी खामियों की वजह से सैकड़ों कर्मचारियों के बैंक खातों में गलत राशि पहुंच गई।

​वेतन भुगतान में भारी अंतर और तकनीकी गड़बड़ी

​इस महीने जब कर्मचारियों का वेतन आया तो स्थिति देखकर हर कोई हैरान रह गया। सॉफ्टवेयर की त्रुटि के कारण 40 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कई कर्मचारियों के खातों में 1 लाख से लेकर 1.5 लाख रुपये तक जमा हो गए। वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी भी हैं जिन्हें उनके वास्तविक वेतन से बहुत कम राशि मिली। इस विसंगति के कारण कम भुगतान पाने वाले कर्मियों के सामने बैंक की ईएमआई चुकाने और घर का खर्च चलाने की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले 6 महीनों से ईआरपी सिस्टम में दिक्कतें आ रही हैं लेकिन प्रबंधन द्वारा इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

​भत्तों के भुगतान और एरियर में भारी देरी

​सॉफ्टवेयर की समस्याओं का असर केवल मासिक वेतन तक सीमित नहीं है। कर्मचारी संगठनों ने बताया कि यात्रा भत्ता, मेडिकल बिल, पीस वर्क और शिफ्ट पेमेंट जैसे जरूरी भुगतानों में भी लगातार देरी हो रही है। अवकाश यात्रा रियायत और विभिन्न प्रकार के एरियर भुगतान में भी कई तकनीकी त्रुटियां सामने आई हैं। इन विसंगतियों को सुधारने के लिए कर्मचारियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि इस तकनीकी समस्या का स्थाई समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में फेडरेशन स्तर पर बड़े आंदोलन की शुरुआत की जा सकती है।

​उत्पादन कार्य छोड़कर कंप्यूटर ऑपरेटर बने कर्मचारी

​नई व्यवस्था के तहत उत्पादन कार्य में लगे औद्योगिक कर्मचारियों पर प्रशासनिक कार्यों का बोझ भी डाल दिया गया है। पहले जो काम दफ्तरों के बाबू करते थे, अब वह काम फैक्ट्री के कर्मचारियों को स्वयं कंप्यूटर पर करना पड़ रहा है। अपनी छुट्टियों की एंट्री से लेकर व्यक्तिगत विवरण अपडेट करने तक की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। कर्मचारियों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति उत्पादन के लिए हुई है, लेकिन अब उनसे डाटा एंट्री का काम कराया जा रहा है। अक्टूबर 2025 से शुरू हुए इस डिजिटल बदलाव ने कर्मचारियों की कार्यक्षमता और मानसिक शांति दोनों को प्रभावित किया है।

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