जबलपुर। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के टेस्टिंग टीम के इंजीनियरों ने तकनीकी दक्षता का प्रदर्शन करते हुए चापड़ा सबस्टेशन में पुराने सिविल फाउंडेशन पर ही कम क्षमता के स्थान पर अधिक क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक सफलतापूर्वक स्थापित कर ऊर्जीकृत कर दिया है। एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता अनिल सक्सेना ने जानकारी दी कि २२० केवी सबस्टेशन चापड़ा में पहले से मौजूद ५ एमवीएआर क्षमता के पुराने कैपेसिटर बैंक के स्थान पर अब १२ एमवीएआर क्षमता का नया कैपेसिटर बैंक चालू किया गया है। इस चौथे कैपेसिटर बैंक की स्थापना के बाद इस सबस्टेशन की कुल क्षमता बढ़कर अब ४८ एमवीएआर हो गई है। इस नई व्यवस्था से क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक स्थिर और बेहतर गुणवत्तापूर्ण बिजली की आपूर्ति मिल सकेगी।
पुराने ढांचे का उपयोग और क्षमता में वृद्धि
इस तकनीकी कार्य की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इंजीनियरों ने बिना किसी अतिरिक्त निर्माण कार्य के पुराने ढांचे का ही उपयोग किया। ५ एमवीएआर के पुराने कैपेसिटर बैंक के सिविल फाउंडेशन पर ही १२ एमवीएआर क्षमता का नया बैंक पूरी तरह फिट कर दिया गया। इससे कंपनी के संसाधनों की बचत हुई और काम भी बेहद कम समय में पूरा हो गया। अधीक्षण अभियंता अनिल सक्सेना के अनुसार इस नए बदलाव के बाद चापड़ा सबस्टेशन की कुल क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है, जिससे आसपास के ग्रिड पर दबाव कम होगा।
उपभोक्ताओं को मिलेगा बेहतर वोल्टेज और स्थिर बिजली
अति उच्च दाब सबस्टेशन में कैपेसिटर बैंक की भूमिका बिजली की कार्यक्षमता बढ़ाने में सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस नए सिस्टम के चालू होने से बिजली सप्लाई के दौरान होने वाले वोल्टेज के उतार-चढ़ाव की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उपभोक्ताओं को बिना किसी ट्रिपिंग या लो वोल्टेज की समस्या के लगातार गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलती रहेगी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को इस क्षमता वृद्धि का सीधा लाभ मिलेगा और उनके बिजली उपकरण भी सुरक्षित रहेंगे।
तकनीकी सुधार से पावर ट्रांसफार्मरों को मिली राहत
कैपेसिटर बैंक की स्थापना से ट्रांसमिशन सिस्टम में रिएक्टिव पावर का संतुलन बेहतर होता है। इससे सबस्टेशन में लगे बड़े पावर ट्रांसफार्मरों पर पड़ने वाला अतिरिक्त लोड काफी कम हो जाता है। सिस्टम का पावर फैक्टर सुधरने से बिजली की बर्बादी रुकती है और वोल्टेज का स्तर मजबूत होता है। चापड़ा सबस्टेशन में क्षमता ४८ एमवीएआर होने से अब पूरा क्षेत्रीय नेटवर्क मजबूत हो गया है, जो आने वाले समय में बिजली की बढ़ती मांग को आसानी से संभाल सकेगा।
