जबलपुर। जिले के बरगी क्रूज हादसे के बाद नगर निगम पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है। इसी क्रम में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने शनिवार को नर्मदा तट गौरीघाट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने नाविकों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाए जाने पर उन्होंने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
लाइफ जैकेट के बिना नाव संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध
नगर निगम आयुक्त ने गौरीघाट और इससे जुड़े अन्य सभी नर्मदा तटों पर बिना लाइफ जैकेट के नाव चलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। वर्तमान में गौरीघाट पर प्रतिदिन 80 से ज्यादा नावें संचालित होती हैं। कई बार नाविक बिना किसी सुरक्षा उपकरण के यात्रियों और उनके वाहनों को नदी पार कराते हैं। ऐसे में किसी भी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि बिना सुरक्षा उपकरणों और लाइफ जैकेट के किसी भी स्थिति में नाव का संचालन नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
श्रद्धालुओं से की गई नौका विहार से बचने की अपील
बदलते मौसम और सुरक्षा के हालात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से नौका विहार से बचने की अपील की है। आयुक्त ने गौरीघाट आने वाले लोगों से कहा कि वे फिलहाल सुरक्षित दूरी बनाए रखें और जल स्तर तथा मौसम की स्थिति सामान्य होने तक नाव में बैठने से परहेज करें। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है, क्योंकि बरगी हादसे के बाद सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा सकती।
दुकानदारों को सौंपी गई स्वच्छता प्रहरी की जिम्मेदारी
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने नर्मदा तटों पर चल रहे स्वच्छता कार्यों की भी समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने तट पर पूजन सामग्री और प्रसाद की दुकानें लगाने वाले दुकानदारों से संवाद किया और उनसे स्वच्छता व्यवस्था का फीडबैक लिया। आयुक्त ने सभी दुकानदारों को स्वच्छता प्रहरी के रूप में नामित किया है। उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने आसपास की स्वच्छता की निरंतर निगरानी करें और श्रद्धालुओं को भी नर्मदा तटों को स्वच्छ रखने के लिए जागरूक करें।
भिक्षुओं के पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम
नगर निगम ने गौरीघाट पर जीवन यापन करने वाले भिक्षुओं के पुनर्वास के लिए भी सकारात्मक पहल की है। जानकारी के अनुसार गौरीघाट क्षेत्र में 367 भिक्षुओं को चिह्नित किया गया था। नगर निगम ने इनमें से 85 प्रतिशत भिक्षुओं का सफलतापूर्वक पुनर्वास और स्थानांतरण कर दिया है। इससे न केवल घाट पर व्यवस्था सुधरेगी, बल्कि भिक्षुओं को एक बेहतर जीवन स्तर भी प्राप्त होगा। नगर निगम के अधिकारी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं।
