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छतरपुर का चतुर्वेदी कांड: हाईकोर्ट ने मंजूर की जमानत



जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर एकलपीठ के माननीय न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल ने छतरपुर जिले के बहुचर्चित चतुर्वेदी कांड के आरोपी शैलेन्द्र राजपूत की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। न्यायालय ने प्रकरण क्रमांक MCRC-21941/2026 की सुनवाई करते हुए ग्राम पाटा, थाना लवकुश नगर निवासी शिवराम राजपूत के पुत्र शैलेन्द्र राजपूत को राहत प्रदान की। आवेदक को थाना लवकुश नगर में दर्ज अपराध क्रमांक 123/2026 के तहत 17 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं 248(ब), 231, 61(2)(अ) और शस्त्र अधिनियम की धाराओं 25, 27 एवं 29 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। सत्र न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल 2026 को जमानत खारिज होने के बाद यह याचिका दायर की गई थी।

​क्या है मामले का घटनाक्रम

​घटनाक्रम के अनुसार 15 मार्च 2026 को सह-आरोपी विपुल चतुर्वेदी ने अपने सगे चाचा सुधाकर चतुर्वेदी को एक झूठे और गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की साजिश रची थी। इस नीयत से विपुल ने खुद अपनी बाईं जाँघ में गोली मार ली और पुलिस को इसकी गलत सूचना दे दी। पुलिस अनुसंधान में जब इस षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ, तो मुख्य आरोपी विपुल चतुर्वेदी के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर शैलेन्द्र राजपूत को सह-आरोपी बनाया गया। पुलिस ने केवल बयान के आधार पर उसे इस पूरे षड्यंत्र का मददगार मानते हुए जेल भेज दिया था, जबकि आरोपी के पास से किसी भी प्रकार का हथियार या अन्य कोई संदिग्ध सामान बरामद नहीं हुआ था।

​कोर्ट में वकीलों के तर्क-वितर्क

​उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता शीर्ष अग्रवाल और नीरजा अग्रवाल ने मजबूत पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि आवेदक पूरी तरह निर्दोष है और उसे इस मामले में दुर्भावनापूर्ण तरीके से घसीटा गया है। उसके खिलाफ कोई भी स्वतंत्र या प्रत्यक्ष गवाह मौजूद नहीं है। इसके साथ ही इस प्रकरण से जुड़े अन्य सह-आरोपियों को पहले ही जमानत का लाभ मिल चुका है। दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता शिखा शर्मा ने इस जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और मामले के सभी दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद, केस के गुण-दोष पर कोई भी टिप्पणी किए बिना आरोपी की जमानत मंजूर कर ली।

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