भोपाल. मध्य प्रदेश के पुलिसकर्मियों को अब गैर-सूचिबद्ध अस्पतालों में भी इलाज मिल सकेगा। साथ ही, छोटे भाई-बहन और दिव्यांग आश्रितों की अनुकम्प नियुक्ति का भी प्रस्ताव सरकार को भेजा है। मध्य प्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना न्यासी मंडल की बैठक में यह निर्णय लिए गए। डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में कानून-व्यवस्था ड्यूटी, अपराध जांच के दौरान हिंसा या पुलिस वाहन दुर्घटना में गंभीर इलाज के लिए अधिक आर्थिक सहायता देने पर भी सहमति बनी है।
59 निजी अस्पताल सूचीबद्ध
प्रदेश सहित आसपास राज्यों के 59 निजी अस्पताल पुलिसकर्मियों के लिए इलाज के लिए सूचिबद्ध हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि इनके अलावा अन्य अस्पतालों में भी पुलिसकर्मी इलाज करा सकेंगे। जिसमें हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना या ड्यूटी के समय घायल होने पर यह इलाज मिल सकेंगा। जिसके लिए पुलिस विभाग स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर यह सुविधा शुरू करेगा।
कैंसर, किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट पर 14 लाख की सीमा तय
मेडिकल रीइम्बर्समेंट के बाद पुलिस हेल्थ सिक्योरिटी प्लान की बाकी राशि कैंसर, किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट, ओपन हार्ट सर्जरी, कोमा और पैरालिसिस की स्थिति में देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्लान के तहत मरीजों की स्थिति स्थिर होने तक इलाज का खर्च उठाया जाएगा। इसको लेकर अधिकतम 14 लाख रुपए तक की सीमा रखी गई है।
छोटे भाई-बहनों को अनुकम्पा नियुक्ति का प्रस्ताव
पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना न्यासी मंडल की बैठक में लिए गए निर्णयों में अनुकम्पा अनयुक्ति को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किए हैं। इसमें पुलिसकर्मियों के छोटे भाई-बहनों और दिव्यांग आश्रितों को योजना में शामिल किया जाएगा। इसका प्रस्ताव तैयार कर प्रदेश सरकार को भेजा जाएगा।
