जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा रेलवे अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा एक कर्मचारी का एक ही महीने में दो बार मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने रेलवे यार्ड स्टेशन मास्टर और जैक्सन रेलवे एम्पलाइज कोऑपरेटिव बैंक कोटा के पूर्व डायरेक्टर संजय चौहान को पहले बिना किसी तय श्रेणी के केवल रेलवे यार्ड सुपरवाइजर ड्यूटी के लिए फिट घोषित कर दिया था। इस प्रमाण पत्र में मेडिकल कैटेगरी न लिखे होने के कारण सीनियर डीओएम ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखा। प्रशासनिक आपत्ति के बाद डॉक्टरों ने तुरंत अपनी गलती सुधारते हुए आनन-फानन में संजय चौहान का ए-3 श्रेणी का नया मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया। यह पूरा मामला अब जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे मुख्यालय तक पहुंच चुका है।
बिना तय श्रेणी के फिट प्रमाण पत्र देने पर उपजा विवाद
कोटा मंडल के इतिहास में यह पहला मौका है जब रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों ने किसी कर्मचारी की मेडिकल श्रेणी तय किए बिना ही उसे नौकरी के लिए फिट होने का प्रमाण पत्र दे दिया। सामान्य प्रक्रिया के तहत रेलवे डॉक्टरों को कर्मचारी की शारीरिक क्षमता के अनुसार ए-1, ए-2 या ए-3 जैसी विशिष्ट श्रेणियां लिखनी होती हैं। इस मामले में डॉक्टरों ने तय नियमों को दरकिनार करते हुए प्रमाण पत्र पर सीधे यह लिख दिया कि कर्मचारी यार्ड सुपरवाइजर की ड्यूटी करने के योग्य है। इस तरह के प्रमाण पत्र से रेलवे प्रशासन में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि कर्मचारियों की कार्यशैली और उनकी पोस्टिंग की जगह अब अधिकारियों के बजाय डॉक्टर तय करने लगे हैं। परिचालन प्रबंधक कार्यालय के उच्च अधिकारियों ने इसे नियमों के सख्त खिलाफ माना है।
प्रशासनिक सख्ती के बाद डॉक्टरों को बदलना पड़ा अपना फैसला
सीनियर डीओएम ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी तो रेलवे अस्पताल प्रबंधन में खलबली मच गई। डॉक्टरों ने अपनी साख बचाने के लिए तुरंत उसी महीने के भीतर पुराना फैसला बदला और कर्मचारी संजय चौहान को ए-3 कैटेगरी का आधिकारिक सर्टिफिकेट जारी कर दिया। एक ही कर्मचारी के स्वास्थ्य परीक्षण को लेकर डॉक्टरों के इस यू-टर्न ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाद के केंद्र में मौजूद यार्ड स्टेशन मास्टर संजय चौहान की रेलवे संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। वह रेलवे एम्पलाई यूनियन के सीधे समर्थन से जैक्सन रेलवे एम्पलाइज कोऑपरेटिव बैंक कोटा के डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। नेता और कर्मचारी के रूप में उनकी दोहरी भूमिका होने के कारण ही इस मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
जबलपुर मुख्यालय पहुंची आंच,हड़कंप
कोटा मंडल का यह अजीबोगरीब मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर जबलपुर स्थित पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य मुख्यालय तक पहुंच गया है। मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद से रेलवे से जुड़े कर्मचारी नेताओं और डॉक्टरों के बीच बेचैनी काफी बढ़ गई है। यूनियन के बड़े पदाधिकारी अब इस पूरे घटनाक्रम से हुए नुकसान को संभालने और मामले को शांत करने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इस प्रशासनिक चूक के कारण आने वाले दिनों में संबंधित डॉक्टरों और जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की तलवार लटक रही है। डॉक्टरों द्वारा दिखाई गई इस विशेष रुचि को कर्मचारी के राजनीतिक रसूख से जोड़कर देखा जा रहा है जिसने अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया है।
