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बांधवगढ़ में बाघ की संदिग्ध मौत: पीएम रिपोर्ट में नए खुलासे, सात आरोपी गिरफ्तार



जबलपुर। जबलपुर में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अंतर्गत पनपथा बफर क्षेत्र के खेरवा टोला गांव में 24 मई को एक नर बाघ का शव मिलने और उसके बाद भड़की हिंसक घटना में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस पूरे मामले में वन्यजीव चिकित्सकों के विशेष पैनल द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गई है। इसमें खुलासा हुआ है कि बाघ के दाहिने कंधे पर मौत के बाद डॉट लगाया गया था और उसकी जान दिल व सांस रुकने से गई थी। वहीं दूसरी ओर बाघ के हमले में एक महिला की मौत और तीन लोगों के घायल होने के बाद भड़की भीड़ द्वारा रेस्क्यू टीम पर किए गए हमले के मामले में पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर बिट्टू उर्फ प्रेमलाल पाल, लक्ष्मण पाल, राधे पाल, रवि तिवारी, द्वारिका उर्फ अजय सिंह, चंद्रशेखर जायसवाल और धरमू पाल सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

​पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौंकाने वाली जानकारियां आईं सामने

​बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय के अनुसार जबलपुर के एसडब्ल्यूएफएच सेंटर में मृत बाघ का दोबारा परीक्षण कराया गया था। तीन वन्यजीव चिकित्सकों और दो विशेष आमंत्रित विशेषज्ञों की इस दूसरी रिपोर्ट में बाघ के शरीर की आंतरिक स्थिति को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मृत बाघ की मांसपेशियां पूरी तरह पीली और सूखी पाई गईं। इसके अलावा उसका पाचन तंत्र भी पूरी तरह से खाली था तथा शरीर की त्वचा खुरदरी और बेजान हो चुकी थी। बाघ के दाहिने कंधे पर एक डॉट का निशान भी मिला था, लेकिन उस स्थान से बिल्कुल भी खून नहीं बहा था। इससे यह पूरी तरह साफ हो गया है कि यह डॉट बाघ की मौत हो जाने के बाद लगाया गया था।

​बीमारी या तनाव से दिल और सांस रुकने की आशंका

​विशेषज्ञों की समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया है कि बाघ की मौत कार्डियक रेस्पिरेटरी फेलियर यानी दिल और सांस रुकने की वजह से हुई थी। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा किसी गंभीर बीमारी, शरीर के अंदरूनी रोग, अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव या फिर किसी प्रकार की विषाक्तता के कारण होना संभावित है। मौत के इन कारणों की वास्तविक और सटीक वजहों का पता लगाने के लिए बाघ के अलग-अलग आंतरिक अंगों के सैंपल लिए गए हैं। इन सभी नमूनों को आगे की गहन जांच के लिए मानक प्रयोगशालाओं में सुरक्षित भेज दिया गया है, जहां से अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।

​ग्रामीणों के हमले में सात नामजद आरोपी हुए गिरफ्तार

​यह पूरा घटनाक्रम 24 मई को उस समय शुरू हुआ था जब ग्राम खेरवाटोला में एक हिंसक बाघ ने अचानक हमला कर दिया था। इस हमले में एक स्थानीय महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद से ही ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त था। जब वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची, तो उग्र भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। भीड़ ने शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए वनकर्मियों के साथ जमकर मारपीट की और सरकारी वाहनों व सामान को भारी नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना से जुड़े वीडियो फुटेज खंगाले और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। इसके आधार पर पुलिस ने अब तक कुल 7 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

​फरार आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस टीमें

​रेस्क्यू टीम पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के इस गंभीर मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी रुख अपनाया है। पकड़े गए सभी 7 आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं दूसरी ओर इस हिंसक वारदात में शामिल करीब आधा दर्जन से अधिक अन्य आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं। पुलिस की विशेष टीमें इन सभी फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। वन विभाग और पुलिस प्रशासन इस मामले की तह तक जाने के लिए आपसी तालमेल के साथ संयुक्त रूप से जांच में जुटे हुए हैं, ताकि घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आ सके।

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