जबलपुर। मध्य प्रदेश राज्य कर्मचारी संघ जबलपुर शाखा के पदाधिकारियों ने डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी से चर्चा कर संभागीय कोष एवं लेखा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन के अटल उपाध्याय, देवेन्द्र पचौरी, आलोक अग्निहोत्री, ब्रजेश मिश्रा, निशांक तिवारी, हेमंत गौतम, शैलेंद्र दुबे, राकेश यादव, कविता येडे, योगेन्द्र मिश्रा, रजनीश पाण्डे, सतीश उपाध्याय, विनय नामदेव, दालचंद पासी, अजय दुबे, दिलराज झारिया, राकेश वर्मा, शैलेन्द्र गौतम, के. जी. पाठक, सतीश देशमुख, अंकित चौरसिया, अमित पटेल, विशाल मसीह, विनीत विश्वकर्मा, के के शर्मा और मनोहर रजक ने बताया कि शासकीय कर्मचारियों को 10/20/30/35 वर्ष की सेवा के बाद मिलने वाले समयमान वेतनमान के अनुमोदन में भारी परेशान किया जा रहा है। आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर के बावजूद जानबूझकर मैनुअल आपत्तियां लगाकर प्रकरणों को महीनों लंबित रखा जाता है।
सॉफ्टवेयर को दरकिनार कर मैनुअल आपत्ति का खेल
संबंधित विभागों द्वारा कर्मचारियों के समयमान वेतनमान के प्रकरण आईएफएमआईएस सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन कोष एवं लेखा कार्यालय को भेजे जाते हैं। नियम के अनुसार यदि कोई त्रुटि है तो उसे सॉफ्टवेयर पर ही दर्ज किया जाना चाहिए। इसके विपरीत कार्यालय का अमला ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग न करते हुए सेवा पुस्तिका पर मैनुअल आपत्ति लगाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल कर्मचारियों को परेशान करना और अड़ंगे लगाना होता है। ऑनलाइन व्यवस्था होने से जो काम उसी दिन हो सकता है, उसे जानबूझकर महीनों तक खींचा जाता है।
महीनों तक प्रकरण दबाकर रखने की प्रवृत्ति
कोष एवं लेखा कार्यालय द्वारा प्रकरणों को 4 से 5 महीनों तक लंबित रखा जाता है। इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकारी एक बार में सारी आपत्तियां दर्ज नहीं करते। एक आपत्ति का निराकरण होने के बाद दूसरी आपत्ति लगा दी जाती है। इस वजह से समयमान वेतनमान के अनुमोदन में अत्यधिक विलंब होता है। आपत्ति लगाए गए मामलों को भी तुरंत संबंधित विभागों को वापस नहीं भेजा जाता और उन्हें दो से तीन महीने तक दफ्तर में ही दबाकर रखा जाता है।
कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक क्षति
सेवा पुस्तिका में जब तक कोष एवं लेखा कार्यालय का अनुमोदन नहीं होता, तब तक कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता है। इस लेतलाली के कारण कर्मचारियों को गंभीर मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। काम कराने के बहाने कर्मचारियों को बार-बार कार्यालय बुलाकर प्रताड़ित किया जाता है। एक तरफ मध्य प्रदेश शासन अपने कर्मचारियों को समय पर लाभ देना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ इस कार्यालय के कुछ लोग सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।
लंबे समय से जमे स्टाफ को हटाने की मांग
कर्मचारी संघ ने डिप्टी कलेक्टर को सौंपे मामले में साफ कहा है कि इस कार्यालय में लंबे समय से जमे हुए अधिकारियों और कर्मचारियों के कारण ही यह अव्यवस्था फैली हुई है। इन सभी का तत्काल अन्यत्र तबादला किया जाना बेहद जरूरी है। संगठन के सभी पदाधिकारियों ने बेवजह आपत्ति लगाकर काम रोकने वाले दोषी अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने और कर्मचारियों की इस हितैषी मांग का शीघ्र निराकरण करने की पुरजोर मांग की है।
