नई दिल्ली। देश भर के 128 रेलवे अस्पतालों और उससे जुड़ीं 582 हेल्थ यूनिटों में रेलकर्मियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों का उपचार पूरी तरह पेपरलेस होगा। इन रेलवे अस्पतालों एवं हेल्थ यूनिट्स में उपचार, दवा वितरण तथा रेफरल संबंधी प्रक्रिया पूरी तरह पेपरलेस की जाएंगी।
मरीजों को केवल अपना यूएमआईडी (उम्मीद) कार्ड एवं एचएमआईएस ऐप पर ही उपचार से जुड़ी सारी जानकारी अपडेट की जाएंगी। एचएमआईएस ऐप पर मरीजों के उपचार से जुड़ी सारी डिटेल होंगी। देश के दूसरे किसी भी रेलवे अस्पताल में इसे देखकर आगे का उपचार कराया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड के एक्जक्यूटिव डायरेक्टर ट्रांसफार्मेशन प्रणव कुमार मलिक और निदेशक हेल्थ पालिसी व प्रोजेक्ट डॉ. आशुतोष गर्ग ने सभी जोनल मुख्यालयों को पत्र जारी कर दिया है।
शत प्रतिशत उम्मीद कार्ड बनाने पर रेलवे का जोर
रेलवे बोर्ड अपने कर्मचारियों और पेंशनरों का उम्मीद कार्ड बनाने पर जोर दे रहा है। करीब 90 प्रतिशत कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों के कार्ड बन चुके हैं। इस कार्ड के यूनिक आइडी नंबर से ही रेलकर्मी अपने स्मार्ट मोबाइल फोन पर एचएमआईएस ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। इस ऐप पर डॉक्टर से परामर्श लेने का अपाइंटमेंट नंबर, डॉक्टरों के लिखे गए उपचार, लैब रिपोर्ट, रेफरल लेटर सहित जानकारियां उपलब्ध होती हैं। कई अस्पतालों और हेल्थ यूनिटों में अब भी पेपर पर ही उपचार, परामर्श, लैब रिपोर्ट, दवा वितरण और रेफरल जैसे काम हो रहे हैं।
से देखते हुए बोर्ड ने पूरी तरह व्यवस्था को लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत रोगियों को अपने पास पंजीकृत मोबाइल नंबर रखना होगा। डिजिटल रेफरल प्रणाली को भी और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। सामान्य परिस्थितियों में रेफर किए गए मरीज सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में यूएमआईडी एवं ओटीपी आधारित सत्यापन के माध्यम से उपचार प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज बिना पूर्व रेफरल के भी सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार प्रारंभ करा सकेंगे, जिसकी सूचना अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
इन बुजुर्गों को सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस ओपीडी व जांच सुविधा
70 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस ओपीडी एवं जांच सुविधा उपलब्ध होगी, बशर्ते वे फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस प्राप्त न कर रहे हों। कैंसर एवं ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रोगों के उपचार में भी डिजिटल रेफरल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे मरीजों को बार-बार रेफरल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
