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पिता को समर्पित काव्य आराधना में भावुक हुए देश-दुनिया के साहित्यकार



जबलपुर। मंथनश्री साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था द्वारा जबलपुर में एक भव्य पितृ स्मृति काव्य आराधना का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अटलांटा से डॉ. श्याम मनोहर सिरोठिया थे और अध्यक्षता महामहोपाध्याय आचार्य डॉ. हरिशंकर दुबे ने की। सारस्वत अतिथि के रूप में तंजानिया से डॉ. ममता सैनी, विशिष्ट अतिथि के रूप में मॉरीशस से गोवर्धन सच्चिदानंद फ़ौदार, राजकुमार महोबिया, योगिता चौरसिया एवं एड. तृप्ति त्रिवेदी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में अमरेंद्र नारायण और मुख्य वक्ता राजेश पाठक प्रवीण ने भी अपने विचार रखे। संस्थापक संतोष नेमा ने स्वागत करते हुए पिता को समर्पित साझा काव्य संग्रह के शीघ्र प्रकाशन की घोषणा की। बलिया से डॉ. आराधना उपाध्याय ने सरस्वती वंदना की। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ एवं प्रतिमा अखिलेश ने किया। स्वागत भाव कविता राय, अर्चना द्विवेदी, कविता नेमा एवं ज्योति मिश्रा ने प्रकट किया तथा आभार प्रदर्शन विजय नेमा अनुज ने किया।

​देश और विदेश के साहित्यकारों का सम्मान

​इस गरिमामयी समारोह में पहली बार देश और विदेश के 111 साहित्यकारों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। संस्था की ओर से इन सभी 111 रचनाकारों को देवी चरण नेमा स्मृति सृजन चेतना अलंकरण से सम्मानित किया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि मंथनश्री का पिता के सम्मान में किया गया यह आयोजन कर्तव्यबोध जगाने वाला और भावुक करने वाला है। वक्ताओं ने माता-पिता के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्हें दुनिया का आधार बताया और पिता को आसमान व महादेव के समान स्थान दिया।

​द्वितीय चरण में पितृ आराधना काव्य गोष्ठी

​कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक विशेष काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। काव्य पाठ करने वालों में  राजेंद्र मिश्रा, आशुतोष तिवारी, सुभाष शलभ, प्रीति नामदेव, तरुणा खरे, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, यशोवर्धन पाठक, सलमा जमाल, प्रभा विश्वकर्मा, आकांक्षा सिंह, डॉ. अंकिता नेमा, डॉ. रंजना जैन, ज्योति प्यासी, रश्मि पाण्डेय, डॉ. सुधि रश्मि बाजपेई, रेखा ताम्रकार, जगतराज प्रजापति, पदमा तिवारी, मदन श्रीवास्तव, राजकुमारी रैकवार, अनुराधा गर्ग, आरती श्रीवास्तव, हेमंत कुमार जैन और कीर्ति चौरसिया शामिल रहे।

​अनेक शहरों के रचनाकारों ने दी प्रस्तुतियां

​काव्य गोष्ठी के क्रम को आगे बढ़ाते हुए रामवल्लभ गुप्त, मुकुल तिवारी, प्रभा खरे, मनोज जैन, अमित सिंह, नीता सिंह, छाया सिंह, निर्मला तिवारी, वंदना सोनी, ज्योत्सना शर्मा, आशीष जैन, शरद नारायण खरे, चंदादेवी स्वर्णकार, सुरेंद्रलाल साहू, कृष्ण कुमार नेमा, विवेक विश्वास मीरजापुर, प्रमोद दाहिया, रजनी कटारे, रचना श्रीवास्तव, देवदर्शन सिंह, अनीसा नेमा भोपाल, मंजूषा नीमा झाबुआ, मोना जैन बड़कुल, प्रदीप नामदेव, मीना कुरील, रेखा नेमा, नारायण तिवारी, सरिता अग्निहोत्री, अमर सिंह वर्मा, संध्या द्विवेदी, स्मिता मिश्रा, संध्या जैन, कुंजीलाल चक्रवर्ती, कालिदास ताम्रकार, गीता गीत, नवनीता दुबे नूपुर, अनिल और निर्मला डोंगरे ने भी कविताएं पढ़ीं।

​भावपूर्ण कविताओं से पितृ महिमा का बखान

​काव्य पाठ के अंतिम दौर में ङाॅ. विधि जैन, आशा निर्मल जैन, अनीता उपाध्याय, सुषमा वीरेंद्र खरे, भोले नेमा, मंजू गुप्ता, बीना शर्मा, कृष्णकांत अग्रवाल, डॉ. एम. एल. शर्मा, डॉ. सुनीता गुप्ता, शिशिर देसाई, रजनी नेमा, डॉ. मंजू गोरे, बसंत शर्मा, विनीता पैगवार, बसंत मिश्रा और डॉ. अनिल कोरी ने अपनी सुंदर रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से पिता को घर की नींव, पहला गुरुदेव, संकटों में ढाल बनने वाला और जीवन की कश्ती का किनारा बताया। पिता के त्याग और उनके प्रति बच्चों के स्वाभिमान को दर्शाती इन रचनाओं को श्रोताओं ने बहुत सराहा।

1 Comments

  1. पिताजी की स्मृति में मंथन श्री द्वारा आयोजित भव्य आयोजन की बहुत ही सुंदर कवरेज खबर अभी तक के भाव को सार्थक करते हुए

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