जबलपुर। जबलपुर और शहडोल क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के आरडीएसएस कार्यों की व्यापक समीक्षा की है। इस महत्वपूर्ण बैठक में पीएफसी के कार्यपालक निदेशक सौरव शाह, मुख्य महाप्रबंधक अरुण श्रीवास्तव, कंपनी के मुख्य महाप्रबंधक संजय भागवतकर, ए.के. तिवारी, संजय निगम, अशोक सिंह धुर्वे, प्रशांत गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक आरिफ मोहम्मद कुरैशी और मुख्य अभियंता प्रमिल कुमार मिश्रा सहित शहडोल, उमरिया एवं अनूपपुर वृत्त के कई अधीक्षण व कार्यपालन अभियंता शामिल हुए। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि क्षेत्र के सभी अविद्युतीकृत घरों का सर्वे तुरंत पूरा कर डेटा तैयार किया जाए ताकि हर पात्र घर तक बिजली पहुंचाई जा सके।
सौर ऊर्जा से फीडरों को जोड़ना मुख्य लक्ष्य
केंद्रीय ऊर्जा सचिव ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर अंतिम रूप देकर जल्द से जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी परिवार बिजली की सुविधा से वंचित न रहे। इसके साथ ही उन्होंने आरडीएसएस योजना के तहत फीडर सेपरेशन में शामिल 874 फीडरों को पीएम कुसुम योजना के साथ जोड़ने पर विशेष जोर दिया। इन फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने से किसानों को खेती के लिए बेहतर बिजली मिलेगी और पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता कम होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास में तेजी आएगी और बिजली वितरण व्यवस्था मजबूत होगी।
वन क्षेत्रों में सुरक्षित बिजली लाइन जरूरी
बैठक में पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश दिए गए। ऊर्जा सचिव ने वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्रों से निकलने वाली एलटी लाइनों को केबल में बदलने का काम तेजी से पूरा करने को कहा। केबलीकरण होने से वन्य जीवों के साथ होने वाले बिजली हादसों को पूरी तरह रोका जा सकेगा, जिससे जंगलों में सुरक्षा बढ़ेगी और बिजली आपूर्ति भी बिना किसी बाधा के अधिक विश्वसनीय हो सकेगी। इसके अलावा आरडीएसएस योजना के तहत पूर्व क्षेत्र कंपनी के 41 ऐसे मामलों की भी समीक्षा की गई जिनमें वन विभाग की अनुमति मिलना बाकी है। सचिव ने अधिकारियों को इन फाइलों के संबंध में वन मंत्रालय के स्तर पर लगातार संपर्क बनाए रखने को कहा ताकि विकास कार्यों में कोई देरी न हो।
बिजली चोरी रोकने में मददगार साबित हो रही एआई तकनीक
समीक्षा के दौरान बिजली सुधारों में आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष प्रस्तुति दी गई। अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से बिजली चोरी वाले संभावित क्षेत्रों और संदिग्ध उपभोक्ताओं की पहचान बेहद आसान और प्रभावी हो गई है। यह एआई सिस्टम उपभोक्ताओं के रोजाना के बिजली उपभोग के तरीके, स्मार्ट मीटर के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की घटनाओं, वितरण ट्रांसफार्मर के ऊर्जा संतुलन, जीआईएस मैपिंग और पुराने बिलिंग रिकॉर्ड का खुद ही बारीकी से विश्लेषण करता है। इस विश्लेषण के आधार पर संदिग्ध गड़बड़ियों की सूची अपने आप तैयार हो जाती है, जिसकी ऊर्जा सचिव ने सराहना की।
स्मार्ट बिजली ऐप से उपभोक्ता जागरूकता बढ़ी
बैठक में उपभोक्ताओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने वाले स्मार्ट बिजली ऐप के कामकाज को भी देखा गया। वर्तमान में लगभग 13 हजार स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हर दिन इस मोबाइल ऐप के माध्यम से अपने घर की बिजली खपत को खुद देख रहे हैं। इससे आम लोगों में बिजली बचाने और डिजिटल सेवाओं को अपनाने के प्रति रुचि बढ़ रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू किए गए नए टैरिफ ऑर्डर के तहत टीओडी योजना को जमीन पर उतार दिया गया है। इस योजना का सीधा लाभ स्मार्ट मीटर वाले सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को मिल रहा है। ऊर्जा सचिव ने इस पहल को देश के लिए अनुकरणीय बताते हुए कहा कि इससे लोड प्रबंधन और उपभोक्ता सेवाओं में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कंपनी के इस डिजिटल मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने की बात कही।
