khabar abhi tak

हाईकोर्ट ने हत्या के 8 आरोपियों को किया बरी, जांच अधिकारी पर एफआईआर का आदेश दिया

 


जबलपुर। जबलपुर हाईकोर्ट ने हत्या के एक पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 8 व्यक्तियों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने नरसिंहपुर की निचली अदालत द्वारा वर्ष 2012 में दी गई आजीवन कारावास की सजा को पूरी तरह रद्द कर दिया। न्यायालय ने न केवल आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि जांच में भारी अनियमितता पाए जाने पर तत्कालीन जांच अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं।

​जांच अधिकारी पर झूठे साक्ष्य गढ़ने का आरोप

​अदालत ने पाया कि तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक एएच रिजवी ने मामले की जांच के दौरान झूठे सबूत तैयार किए थे। पुलिस ने यह दावा किया था कि मृतक अजय राय के कपड़े आरोपी मोहन पटेल के घर से मिले थे, लेकिन शव पंचनामा के दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि मृत्यु के समय वे कपड़े मृतक के शरीर पर ही थे। न्यायालय ने इस कृत्य को गंभीर माना और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी रिजवी के खिलाफ आपराधिक साजिश और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाए।

​गवाहों के बयानों में मिली गंभीर खामियां

​सुनवाई के दौरान गवाहों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे। गवाह राजाराम मेहरा 15 दिनों तक पुलिस की कस्टडी में रहा था, जिससे शिनाख्त परेड का कानूनी आधार खत्म हो गया। दूसरे गवाह चैतन्य तिवारी ने घटना की वास्तविक तारीख से एक दिन पहले ही वारदात देखने की बात कही थी, जिसे अदालत ने तार्किक रूप से असंभव माना। इसके साथ ही मृतक द्वारा दिए गए मौखिक मृत्यु पूर्व कथन को भी मेडिकल रिपोर्ट से मेल न खाने के कारण खारिज कर दिया गया।यह मामला 31 अक्टूबर 2009 का है, जिसमें अजय राय की मौत हुई थी। इस प्रकरण में संतोष अहिरवार, सोहिल, मोनू उइके, मोहन पटेल, मधु यादव, मनीष यादव, राजकुमार पटेल और नितेश उर्फ जट्टू वंशकार को आरोपी बनाया गया था। सत्र न्यायालय नरसिंहपुर ने अगस्त 2012 में कुल 10 लोगों को सजा सुनाई थी। इनमें से एक की मौत हो चुकी है और दो अपनी सजा काट चुके हैं। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस को निर्दोष लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak