इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कुत्तों की नसबंदी के बाद उनके अंगों को बिना किसी सुरक्षा या प्रिजर्वेशन के एक किराए के मकान में रखा था, जिससे इलाके में गंभीर बीमारी और संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया। दरअसल मंडला नगर पालिका ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके टीकाकरण का ठेका जबलपुर की इस कंपनी को दिया था। काम करने के लिए फर्म ने शहर में एक मकान किराए पर लिया था। मामला तब खुला जब मकान मालिक निशा सिंह को वहां कुछ अजीब दुर्गंध और गड़बड़ महसूस हुई, जिसकी उन्होंने शिकायत की। इसके बाद नगर पालिका, पुलिस और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने जब वहां छापा मारा, तो कमरे के अंदर का नजारा देखकर सब सन्न रह गए।
24 दिन बाद दर्ज हुई FIR-
नगर पालिका के स्वास्थ्य प्रभारी श्यामा चरण चौधरी के मुताबिक, जांच के दौरान टीम को कमरे में 28 नर और 10 मादा कुत्तों के अंग मिले। इन्हें बिना किसी वैज्ञानिक तरीके या प्रिजर्वेशन के स्टोर किया गया था, जिससे सड़ांध पैदा हो रही थी और मानव स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा खड़ा हो गया था। हालांकि, इस मामले में कानूनी प्रक्रिया थोड़ी धीमी रही। शिकायत का आवेदन 10 अप्रैल को ही दे दिया गया था, लेकिन पुलिस ने पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद 4 मई को विधिवत स्नढ्ढक्र दर्ज की।
इन पर कार्रवाई, पुलिस ने की घेराबंदी-
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के लिए फर्म के संचालक सचिन कुमार जाट के साथ-साथ कर्मचारी आशीष मनमटका, अरविंद पटेल, सुबोध और शुभम के खिलाफ बीएनएस की धारा 271 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन अंगों को नष्ट करने के बजाय इतने दिनों तक वहां क्यों जमा करके रखा गया था और क्या फर्म ने अनुबंध की अन्य शर्तों का भी उल्लंघन किया है।