आयुध निर्माणी से महज 6 किलोमीटर दूर गदेरी गांव में मचा हड़कंप
जबलपुर। डुमना एयरपोर्ट के पास स्थित ग्राम गदेरी में शुक्रवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब सुनील यादव के प्लॉट पर मकान निर्माण के लिए पिलर की खुदाई के दौरान जमीन के भीतर दबा एक 12 किलोग्राम से अधिक वजनी जिंदा सैन्य बम बरामद हुआ। करीब 3 से 4 फीट नीचे मिले इस संदिग्ध बम को देखकर मजदूरों ने तुरंत काम रोक दिया और इसकी सूचना मकान मालिक को दी, जिसके बाद खमरिया थाना पुलिस और बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) तत्काल मौके पर पहुंचा। विशेषज्ञों ने जांच के बाद पुष्टि की कि जमीन में दबा हुआ यह बम एक अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस यानी बिना फटा सैन्य गोला-बारूद है, जो पूरी तरह सक्रिय अवस्था में था और फटने की स्थिति में इसकी मारक क्षमता लगभग 50 मीटर के दायरे तक हो सकती थी। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खमरिया थाना प्रभारी राजकुमार खटीक ने पुलिस बल की मदद से पूरे क्षेत्र की घेराबंदी करवाई और आसपास के लोगों को सुरक्षित दूर हटाकर बम को सैन्य अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया।
मजदूरों ने कबाड़ समझकर की थी निकालने की कोशिश
गदेरी गांव में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान जब मजदूर जमीन की खुदाई कर रहे थे, तभी उन्हें लोहे जैसी कोई भारी वस्तु दिखाई दी। शुरुआत में इसे साधारण कबाड़ समझकर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन पूरी तरह साफ होने पर उसकी आकृति हूबहू सैन्य बम जैसी दिखने लगी। खतरे का अहसास होते ही वहां मौजूद लोग पीछे हट गए। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके।
आयुध निर्माणी खमरिया से जुड़ी हो सकती हैं कड़ियां
जिस स्थान पर यह शक्तिशाली बम मिला है, वह सैन्य क्षेत्र और आयुध निर्माणी खमरिया से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस वजह से यह प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि यह काफी पुराना बम है, जो सेना के किसी पुराने अभ्यास या परीक्षण के दौरान यहां आकर गिरा होगा और समय के साथ मिट्टी में दफन हो गया। खमरिया थाना प्रभारी के अनुसार, बम को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लेकर सेना की विशेषज्ञ टीम को सौंप दिया गया है, जो अब इसे किसी सुनसान और सुरक्षित स्थान पर ले जाकर निष्क्रिय करने की कार्रवाई कर रही है। इसके साथ ही सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि यह सैन्य शेल इस रिहायशी इलाके तक कैसे पहुंचा।
