जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर के गोलबाजार स्थित लगभग 12,800 वर्गफुट सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने इस मामले में जिला प्रशासन और नगर निगम को त्वरित रूप से जांच और कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने जबलपुर के कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को आदेश दिया है कि वे विवादित भूमि की जांच करें और यदि यह जमीन सरकारी पाई जाती है, तो 22 जून 2026 तक वहां से हर हाल में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को पूरा किया जाए। इस मामले में याचिकाकर्ता जयदीप शाह और हस्तक्षेपकर्ता अमित जैन की तरफ से स्थानीय पार्षद अयोध्या तिवारी सहित अन्य लोगों पर सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप लगाए गए हैं।
तीन दिनों में नया अभ्यावेदन सौंपने और भूमि के स्वामित्व की जांच करने का आदेश
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया कि इस विवादित जमीन को लेकर पहले भी शासन और प्रशासन को शिकायतें भेजी गई थीं, लेकिन उन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अदालत ने अब याचिकाकर्ता को निर्देश दिया है कि वे 3 दिनों के भीतर जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त के समक्ष एक नया आवेदन प्रस्तुत करें। इसके बाद दोनों जिम्मेदार अधिकारी संयुक्त रूप से जमीन के रिकॉर्ड की जांच करेंगे और यह तय करेंगे कि विवादित भूमि वास्तव में सरकारी है या निजी।
अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्रशासन को मिला 30 दिनों का समय
यदि प्रशासनिक जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि 12,800 वर्गफुट जमीन सरकारी है, तो नगर निगम और जिला प्रशासन को अवैध निर्माण और कब्जे को हटाने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच से लेकर बेदखली तक की यह पूरी प्रक्रिया 22 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से संपन्न हो जानी चाहिए। प्रशासन को इस अवधि में की गई पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
जून के अंतिम सप्ताह में होगी मामले की अगली सुनवाई
इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपनी समय-सीमा तय कर दी है। हाईकोर्ट ने शासन और नगर निगम प्रशासन को चेतावनी दी है कि तय समय में कार्रवाई न होने पर इसे गंभीरता से लिया जाएगा। इस पूरे मामले में अगली सुनवाई के लिए 25 जून 2026 की तारीख तय की गई है, जिसमें प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
