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MLA निर्मला सप्रे दलबदल केस, हाईकोर्ट चीफ जस्टिस बोले, समय-सीमा 90 दिन है तो 720 दिन में निराकरण क्यों नहीं हो पाया

 

जबलपुर। सागर की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दलबदल मामले में हाईकोर्ट में दायर याचिका पर आज सुनवाई हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने विधायकी शून्य करने की मांग पर पक्षों से जवाब मांगा।

                                       सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को बताया कि मामले की विधिवत सुनवाई विधानसभा स्पीकर द्वारा की जा रही है और उमंग सिंघार द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की जांच की प्रक्रिया जारी है। इस पर चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दलबदल मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने 90 दिनों के भीतर निर्णय देने की समय सीमा तय की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समय सीमा 90 दिन हैए तो 720 दिनों में भी मामले का निराकरण क्यों नहीं हो पाया। चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन स्पीकर के संज्ञान में लाएं। वहीं उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने भी मांग की कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 90 दिन की समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाए। मामले में हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 जून की तारीख तय की है।

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान BJP के मंच पर दिखी थीं-

गौरतलब है कि 2023 में बीना सीट से निर्मला सप्रे ने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था। 5 मई 2024 को लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वे सीएम मोहन यादव के साथ बीजेपी के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। इसके बाद उनके बीजेपी में शामिल होने के दावे किए गए थे। 5 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सप्रे की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए स्पीकर के समक्ष याचिका लगाई। इसमें कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत पार्टी बदलने पर विधायक की सदस्यता खुद.ब.खुद समाप्त हो जाती है। जब इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया तो सिंघार ने नवंबर 2024 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।


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