
जबलपुर. भारतीय रेल के लाखों ट्रैक मेंटेनर्स, कीमैन और पेट्रोलमैन के लिए प्राइवेसी के मोर्चे पर एक बड़ी जीत हुई है। रेलवे बोर्ड ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि अब किसी भी रेल कर्मचारी की लोकेशन ट्रैक करने के लिए उनके निजी मोबाइल फोन (पर्सनल फोन) का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के व्यक्तिगत जीवन में तकनीक के जरिए होने वाली इस तांक-झांक को तुरंत रोका जाए। पिछले कुछ समय से कई रेल मंडलों में ग्राउंड स्टाफ पर यह दबाव बनाया जा रहा था कि वे अपने निजी मोबाइल में थर्ड पार्टी या प्राइवेट ट्रैकिंग एप इंस्टाल करें। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष था।
उनका तर्क था कि निजी फोन में उनकी व्यक्तिगत जानकारी, परिवार की तस्वीरें और निजी चैट्स होती हैं, और किसी भी ऐप के जरिए उनकी हर गतिविधि पर नजर रखना उनकी प्राइवेसी का सीधा उल्लंघन है। रेलवे बोर्ड ने 23 मार्च को जारी अपने आधिकारिक आदेश में साफ़ किया है कि गश्त की निगरानी के लिए रेलवे को खुद के आधिकारिक जीपीएस जीपीएस डिवाइस उपलब्ध कराने चाहिए। किसी भी कर्मचारी को अपने निजी फोन पर ट्रैकिंग एप चलाने के लिए मजबूर करना गलत प्रैक्टिस है और इसे तत्काल बंद किया जाए। आधिकारिक डिवाइस का उपयोग करने से न केवल कर्मचारियों की प्राइवेसी सुरक्षित रहेगी, बल्कि रेलवे का डेटा भी सुरक्षित और विश्वसनीय रहेगा।वेस्ट सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे अधिकारों की जीत बताया है। इस आदेश के बाद अब अधिकारियों द्वारा निजी फोन के इस्तेमाल का दबाव खत्म हो जाएगा। अब कर्मचारियों को केवल रेलवे द्वारा मुहैया कराए गए सरकारी जीपीएस उपकरणों से ही अपनी ड्यूटी रिपोर्ट करनी होगी।
