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जबलपुर में फायर ऑडिट न होने से बढ़ा खतरा,ननि के अधिकारी बोले स्टाफ नहीं है



जबलपुर। जबलपुर में फायर एनओसी की जांच और सुरक्षा मानकों की स्थिति को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने गंभीर चिंता जताई है। मंच के अनुसार शहर में फायर सेफ्टी प्लान और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की जांच का कार्य लगभग ठप्प पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषियों पर कार्रवाई करना तो दूर, प्रशासन की ओर से 1 अप्रैल के बाद से कोई नोटिस तक जारी नहीं किया गया है। आखिरी नोटिस इसी तारीख को दिया गया था, जिसके बाद से पूरी प्रक्रिया सुस्त नजर आ रही है।

​अधिकारियों ने कहा,अमला नहीं है

​इस संबंध में जब उपभोक्ता मंच के प्रतिनिधियों ने फायर अधिकारी कुशाग्र ठाकुर और गजेंद्र पटेल से चर्चा की, तो अधिकारियों ने स्टाफ की कमी का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पर्याप्त कर्मचारियों के न होने के कारण फायर एनओसी की चेकिंग के काम में सुस्ती आई है। मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि 17 जनवरी 2025 को आयुक्त नगरीय प्रशासन म.प्र. शासन ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। एक वर्ष पूर्व जारी इन निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन और नगर निगम ने मामले में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई है।

​रिहायशी क्षेत्रों में बढ़ा सुरक्षा का खतरा

​शहर के कई रिहायशी इलाकों में ज्वलनशील सामग्री के गोदाम और कारखाने संचालित हो रहे हैं। सघन बस्तियों के बीच मौजूद इन स्थानों पर कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मांग की है कि एक विशेष जांच दल का तत्काल गठन किया जाए ताकि सुरक्षा मानकों की पड़ताल कर कड़ी कार्रवाई की जा सके। इस मुद्दे को लेकर मंच ने महापौर, नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर को पत्र भी प्रेषित किया है। इस चर्चा के दौरान डीआर लखेरा और टीके रायघटक भी उपस्थित रहे।

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