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मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पीएफ ट्रस्ट का ऐतिहासिक कदम: पहली बार वित्तीय वर्ष खत्म होते ही जारी हुई लेखा पर्ची

 


जबलपुर। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल कर्मचारी भविष्य निधि न्यास ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि खातों की वार्षिक लेखा पर्ची जारी कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। विभाग ने इस बार 9.5 प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर निर्धारित की है। प्रदेश के विद्युत इतिहास में यह प्रथम अवसर है जब वित्तीय वर्ष खत्म होने के ठीक अगले दिन यानी 1 अप्रैल को ही सभी अभिदाताओं की पर्चियां उपलब्ध करा दी गई हैं। पूर्ववर्ती मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल से जुड़ी समस्त उत्तरवर्ती कंपनियों के कार्यरत और सेवानिवृत्त कार्मिक अब अपने खातों का विवरण ऑनलाइन देख सकते हैं।

​डिजिटल पोर्टल पर विवरण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया

​न्यास द्वारा लेखा पर्ची को मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। कर्मचारी निर्धारित लिंक पर जाकर अपना विवरण प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए यूजर आईडी के रूप में कार्मिक को अपना आठ अंकों का जीपीएफ खाता नंबर उपयोग करना होगा। https://www.mptransco.in/pfslip/ में लॉग इन करने हेतु पासवर्ड के लिए संबंधित कार्मिक को अपने नाम के शुरुआती चार अक्षर बड़े अक्षरों में लिखकर उसके साथ अपना आठ अंकों का जीपीएफ नंबर दर्ज करना अनिवार्य है। सफल लॉग इन के पश्चात स्क्रीन पर वार्षिक पीएफ स्लिप का विकल्प दिखाई देगा, जहां से संबंधित वित्त वर्ष का चयन कर रिपोर्ट पीडीएफ प्रारूप में डाउनलोड की जा सकती है। तकनीकी बाधा से बचने के लिए कार्मिकों को अपने ब्राउज़र का पॉप-अप विकल्प चालू रखने की सलाह दी गई है।

​विभागीय समन्वय और टीम का विशेष योगदान

​इस त्वरित उपलब्धि को हासिल करने में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी मुकुल मल्होत्रा का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। उनके साथ संयुक्त निदेशक भविष्य निधि कमलेन्द्र झा और उप निदेशक सुजीत खटीक के कुशल निर्देशन में पूरी प्रक्रिया को समय सीमा में पूरा किया गया। इस कार्य को धरातल पर उतारने में लेखाधिकारी वीरेंद्र कुमार, कार्यालय सहायक योगेश जैन और उनकी पूरी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। टीम के साझा प्रयासों से ही हजारों कर्मचारियों को नए वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में ही उनके निवेश और ब्याज की सटीक जानकारी प्राप्त हो सकी है। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ने के साथ ही कर्मचारियों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है।

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