जबलपुर। भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें बढ़ गई हैं क्योंकि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की कोर्ट ने उन पर आपराधिक अवमानना का स्वतः संज्ञान लिया है। यह मामला जस्टिस विशाल मिश्रा को फोन करने से जुड़ा है, जिसे न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश माना जा रहा है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। अब संजय पाठक को 21 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर अपना जवाब देना होगा।
विधायक ने मांगी माफी,गलती हो गयी
विधायक संजय पाठक ने इस गंभीर मामले में लिखित रूप में माफी मांगते हुए अपनी सफाई पेश की है। उनका कहना है कि जस्टिस विशाल मिश्रा को वह कॉल गलती से लग गया था। हालांकि, कोर्ट इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखा और नोटिस जारी कर पूछा कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। आगामी 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई में देश के जाने-माने सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी विधायक की ओर से कोर्ट में पक्ष रखेंगे। गौरतलब है कि जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित की याचिका पर यह सुनवाई की है।
अवैध खनन मामले की सुनवाई के दौरान हुआ संपर्क
विवाद की जड़ 1 सितंबर 2025 की वह घटना है जब विधायक पाठक के परिवार से जुड़ी खनन कंपनियों का मामला जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत में लंबित था। जस्टिस मिश्रा ने अपने आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि भाजपा विधायक ने उनसे एक विशेष मामले पर चर्चा करने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया। इस हस्तक्षेप के कारण जस्टिस मिश्रा ने उस रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने बीते गुरुवार को विजयराघवगढ़ विधायक के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश भी दिए थे, क्योंकि याचिका में आरोप लगाया गया था कि विधायक का यह कृत्य सीधे तौर पर न्यायपालिका के कार्य में बाधा डालने जैसा है।
